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विश्व जल दिवस: ‘डे जीरो’ की ओर बढ़ रहे 200 शहर,10 मेट्रो सिटी!

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दुनियाभर के 200 शहर और 10 मेट्रो सिटी ‘डे जीरो’ की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें भारत का बेंगलुरु भी शामिल है। ‘डे जीरो’ का मतलब है- वह दिन जब पानी की टोंटियों से जल आना बंद हो जाएगा। यदि ऐसा होता है कई शहरों में पानी की किल्ल्त हो जाएगी और लोगों का जीना दूभर हो जाएगा।
सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वाइरनमेंट सीएसई द्वारा प्रकाशित एक पत्रिका ‘डाउन-टु-अर्थ’ में छपी रिपोर्ट ने विश्व जल दिवस से एक दिन पहले दुनियाभर के तमाम शहरों को चेताया है। बता दें कि 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीकी शहर केपटाउन की तरह ही दक्षिण भारत के बेंगलुरु शहर में भी तेजी से जलस्तर घट रहा है। कुछ ही सालों या फिर कुछ ही महीनों में यहां पानी की भयंकर समस्या पैदा हो सकती है। हाल ही में यहां ‘डे जीरो’ को रोकने की कोशिश होगी, जिसके तहत शहर के सभी वॉटर टैप टोंटियों को बंद करके पानी बचाया जाएगा

 

आध्यात्म

VIDEO : वो डायरी जिसके पन्नों में लिखकर उसे जला देते थे PM Modi!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज जन्मदिन है। आज वह 70 वर्ष के हो गए हैं। इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं पीएम मोदी की जिंदगी से जुड़े कुछ फैक्ट्स।क्या आपको पता है कि पीएम मोदी को करीब से जानने और समझने का सबसे बेहतरीन जरिया एक खास किताब है।

इसके बारे में नरेंद्र मोदी ने खुद बताया है। इतना ही नहीं, इस किताब के छपने की कहानी भी अपने आप में बेहद रोचक है। वो कौन सी किताब है? इसे मोदी ने कब और कैसे लिखा? इसमें किस बारे में बात की गई है? क्या है इसके छपने की कहानी? इस बारे में हम आपको बताते हैं।

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यह कहानी तब की है जब मोदी युवा अवस्था में थे। यह कहानी उस युवा नरेंद्र मोदी की है जो लगभग हर रोज डायरी लिखा करते थे, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि वो हर छह से आठ महीने के बाद उस डायरी के लिखे पन्ने जला दिया करते थे।

एक दिन मोदी के एक प्रचारक मित्र नरेंद्र भाई पंचासरा ने उन्हें ऐसा करते देख लिया उन्होंने नरेंद्र मोदी को समझाया और ऐसा करने से मना किया। बाद में नरेंद्र मोदी की उस डायरी के बचे पन्नों ने एक किताब का रूप लिया। ये किताब 36 साल के नरेंद्र मोदी के विचारों का संग्रह है। क्या है इसका नाम और प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इसके बारे में क्या कहा है, ये भी जानिये। इस किताब का नाम है- ‘साक्षीभाव’।

 

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