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प्रादेशिक

न्यूज़ एंकर को छेड़ हंसते रहे मनचले, बाद में थाने में इस हाल में खड़े आए नज़र

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आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में एक न्यूज़ एंकर से चलती रोड पर छेड़खानी करने वाले दो युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एक निजी टीवी चैनल में न्यूज़ एंकर दामिनी माहौर भगवान टॉकीज़ से एम जी रोड पर जा रही थी। इसी बीच पीछे से आए दो मनचले उसपर फब्तियां कसने लगे। पहले तो दामिनी ने उन्हें इग्नोर किया लेकिन बाद में युवकों ने हद पार करते हुए दामिनी से जबरदस्ती बात करने की कोशिश की। इसके बाद कोई चारा न देख दामिनी ने मनचलों की बाइक की फोटो खींचनी चाही तो दोनों ने चिल्लाकर कहा कि नंबर फर्जी है। तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।

दामिनी ने 1090 यानी महिला हेल्पलाइन से मदद भी मांगी। बावजूद इसके किसी ने उसकी मदद नहीं की। हेल्पलाइन टीम सोती रही। दामिनी ने पूरी घटना को फेसबुक पर पोस्ट की, जो वायरल हो गई। पुलिस ने इस मामले में आरोपी मनचलों को गिरफ्तार कर भी कर लिया है लेकिन अब महिला हेल्पलाइन टीम पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

दामिनी ने ये लिखा अपने फेसबुक पोस्ट में

25 जनवरी 2018 रात 8 बजे मैं भगवान टॉकीज़ से एम जी रोड पर जा रही थी।भगवान टॉकीज़ से ये दो नौजवान युवक,जो कि नशा किये हुए थे।मुझे इशारे करते हुए मेरे साथ साथ चलने लगे।मैंने पहले तो इनको नज़रअंदाज़ किया लेकिन थोड़ी देर बाद ये मुझसे बात करने की कोशिश करने लगे।सूरसदन पर आकर मैंने अपना रास्ता बदल लिया और दूसरी तरफ मुड़ गयी। वहीं ये लोग भी पीछे पीछे आ गए। जब मैं बहुत परेशान हो गयी तो मैं इन दोनों की गाड़ी के नम्बर की फोटो खींचने लगी तो पीछे बैठा युवक बोला कि नम्बर फ़र्ज़ी है।फिर जब मैंने उसकी फोटो ली तो वो अलग अलग पोज़ देने लगा। जैसा कि आप फोटो में देख सकते हैं।शर्म और डर नाम की कोई चीज़ इनके चेहरे पर दिखाई नहीं दे रही।

बात यहीं खत्म नहीं हुई।मैंने घर आकर महिला हेल्प लाइन नम्बर ‘1090’ पर फोन किया और अपनी कम्प्लेंट रजिस्टर करानी चाही।तो वहाँ मेरी बात सुनने के बाद बोला गया कि आपके पास कम्प्लेंट रजिस्टर का नम्बर आएगा। और आज 4 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कम्प्लेंट रजिस्टर नहीं मिला जहां मुझे ‘महिला हेल्प लाइन’ सेवा नाकाम होती दिखी।

ये युवक तो चले गए बेशर्मों की तरह… पर मुझे शर्म आयी हमारी महिला हेल्प लाइन पर हमारी पुलिस पर सरकार पर जिसका कोई ख़ौफ़ इन बेशर्म लड़कों की शक्ल पे दूर दूर तक नज़र नहीं आ रहा।इन्होंने मेरे साथ जो किया वो गुनाह इतना बड़ा नहीं था।पर ऐसी मानसिकता वाले ये लड़के जिन्हें पुलिस का कोई ख़ौफ़ नहीं यही लड़के आज अगर किसी को छेड़ रहे है तो कल किसी का बलात्कार भी इसी बेशर्मी से कर के किसी लड़की की ज़िंदगी बर्बाद कर देंगे। नेता पहुंच जाएंगे कैंडल जला कर अपना चेहरा चमकाने के लिये।और हाथ पर हाथ रख कर बैठी रह जायेगी ये नाम की महिला हेल्प लाइन ,पुलिस और सरकारें।

आज मुझे बड़े ही अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि
मुझे शर्म है ऐसी #womenhelpline #sspagra, #dgpup,#yogiadityanath पर।

नेशनल

CBI जाँच क्यों नहीं, UP में हजारों करोड़ का सरकारी धन डकार गए फर्जी शिक्षक

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देश में शिक्षकों की नियुक्ति में सबसे बड़े घोटाले का खुलासा यूपी में हुआ है। बीते वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग में हजारों शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों से सरकारी नौकरी न सिर्फ हथियाई बल्कि हजारों करोड़ का वेतन भी हजम कर डाला है। यूपी में एसआईटी और एसटीएफ की शुरूआती जांच में जो खुलासे हो रहे हैं उससे हर कोई दंग है। कार्रवाई के नाम पर बड़े अफसर सिर्फ एफआईआर और वेतन वसूली दिखाकर अपनी गर्दन बचाने की जुगत में हैं। हकीकत यही है प्रदेश में शिक्षा विभाग को माफिया के हाथों पिछली सरकारों में मानो गिरवी ही रख दिया गया। सवाल ये भी है आखिर जिन अफसरों-नेताओं-मंत्रियों के सिंडिकेट ने यूपी के शिक्षा महकमे ने अरबों की रिश्वत लेकर बीते एक दशक के दौरान हजारों फर्जी नियुक्तियां की हैं वो कब जेल की सलाखों के पीछे जायेंगे। सबसे बड़ा सच ये भी है कि इन भ्रष्टों के रिश्तेदारों को भी सरकारी शिक्षकों की नौकरियां रेवड़ियों की तरह बांटी गयी हैं।
यूपी में आगरा के भीमराव अम्बेडकर विश्विद्यालय से जारी 2823 शिक्षकों की डिग्री फर्जी पाई गयी है

up fake degree scam

जिन्होंने बेसिक शिक्षा महकमे के अधीन परिषदीय स्कूलों में नियुक्ति पाई थी। भर्तियां वर्ष 2004-2005 से लेकर वर्ष 2016 तक पूरे प्रदेश में की गयी है। फिलहाल 930 शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है 497 शिक्षकों पर विभाग ने कार्रवाई का डंडा चलाया है वहीं 1427 शिक्षकों से वेतन वसूली की तयारी है लेकिन बेसिक शिक्षा महकमे के आंकड़ों में बड़ा झोल भी है। दरअसल आगरा के भीमराव आबेडकर विश्विद्यालय से डिग्री लिए एक हजार से ज्यादा शिक्षक अपने दस्तावेजों को असली बता रहे हैं डिग्रियां वाकई असली हैं या नकली। इसकी रिपोर्ट सरकार जारी करने से क्यों हिचक रही है
एसआईटी जांच में हुए इस हैरतअंगेज खुलासे के बाद अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने फर्जी शिक्षकों से वसूली करने व एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जिलों को जारी किये हैं हर शिक्षक से औसतन 60 लाख की वेतन वसूली होना तय है। करीब नौ सौ करोड़ की बड़ी सरकारी रकम इन फर्जी शिक्षकों से वसूली जायेगी।

जल्द ही प्रदेश के अफसर अपनी रिपोर्ट शासन को सौपेंगे। एसआईटी के पास शिक्षा महकमे के घोटालों की कई और जांचें भी हैं दरअसल डिजिटल तकनीक से यूपी के शिक्षा महकमे में रोजाना नए घोटालों का खुलासा हो रहा है परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों का डाटा मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप पर अपलोड कराने के बाद फर्जीवाड़ों के नए किस्से सामने आये। पूरा खेल 2008 से 2019 के बीच अंजाम दिया गया है मानव संपदा पोर्टल पर 15 जुलाई तक डाटा सत्यापित होने के बाद करीब 5 हजार से ज्यादा शिक्षकों के दस्तावेजों में गड़बड़ियां आना तय माना जा रहा है एसआईटी के अलावा एसटीएफ ने भी सीएम योगी के आदेश पर यूपी में हजारों शिक्षकों के दस्तावेजों में धांधलियों की जांच शुरू की है। हजारों शिक्षकों ने नियुक्ति के समय जो पैन नंबर दिया था वह उसी नाम के किसी अन्य शिक्षक के नाम पर दर्ज था।

दरअसल शिक्षकों के द्वारा पैन नम्बर बदले जाने की जानकारी जैसे ही शासन को मिली। सभी अफसरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। सैकड़ों ऐसे मामले भी सामने आएं, जिनमें कई शिक्षकों का वेतन एक ही बैंक खाते में जा रहा था। बस फिर क्या था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घोटाले की जानकारी होते ही बेसिक शिक्षा विभाग के फर्जीवाड़े की जांच एसटीएफ को सौप दी गयी।
यूपी के शिक्षा महकमे के खेल बड़े निराले हैं हाल ही में अनामिका शुक्ला प्रकरण सामने आया था। जिसमे खुलासा हुआ कि अनामिका खुद तो बेरोजगार थी लेकिन उसके शैक्षिक दस्तावेजों पर 25 जिलों के कस्तूरबा स्कूलों में फर्जी शिक्षिकाएं नौकरी कर रही थी। एसटीएफ की जांच आगे बढ़ी तो शिक्षा माफिया के खेल का पर्दाफाश हो गया। खुद बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश दिवेदी ने भी इस गंभीर मामले पर सफाई पेश की थी।
योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा महकमे में फर्जीवाड़ों को देखने के बाद माध्यमिक और उच्च शिक्षा में भी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया शुरू की है इस सिलसिले में डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने हाल ही में सरकार की और से अपना पक्ष रखते हुए शिक्षा माफिया पर सख्ती की बात भी कही है लेकिन इस तरह के फर्जीवाड़ों से एक बात जरूर निकल कर सामने आ रही है आखिर क्यों उत्तरप्रदेश में शिक्षा विभाग को भिक्षा विभाग कहा जाता है

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