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पाक रेंजर्स ने की गोलीबारी, बर्थ-डे के दिन शहीद हुआ बीएसएफ जवान

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जम्मू। पाकिस्तानी रेंजर्स की ओर से जम्मू-कश्मीर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर संघर्षविराम का उल्लंघन करते हुए की गई गोलीबारी में बुधवार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का एक जवान शहीद हो गया।

बीएसएफ सूत्रों ने बताया कि जवान की पहचान 173वीं बटालियन के आर. पी. हंजरी के रूप में हुई है। हंजरी सांबा सेक्टर में तैनात बीएसएफ में हेड कॉन्सटेबल पद पर तैनात थे और बुधवार को उनका जन्मदिन भी था।

बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जवाबी गोलीबारी की गई है। यह घटना शाम करीब साढे चार बजे की है। हंजरी सांबा जिले के सबसेक्टर हीरानगर में चक दुल्मा पोस्ट पर तैनात थे। उन्हें शाम करीब 4.15 बजे गोली लगी। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

सूत्र के मुताबिक सांबा और हरिनगर सेक्टर में जवाबी कार्रवाई करते हुए बीएसएफ की ओर से भारी गोलीबारी गई है जो बुधवार देर रात तक जारी रही। सीमा पर पाकिस्तान की ओर से हुई भारी गोलीबारी के कारण तनाव का माहौल बना हुआ है।

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प्रवासी कामगारों को घर भेजने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की- सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से प्रवासी कामगार अपने राज्य लौट रहे हैं। अपने घर वापस लौटने के दौरान उन्हें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने बीते मंगलवार को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। जस्टिस अशोक भूषण, संजय किशन कौल और एमआर शाह ने केन्द्र, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस भेजते हुए 28 मई तक जवाब देने के लिए कहा था। कोर्ट ने पूछा था कि उनकी स्थिति में सुधार के लिए आखिर क्या कदम उठाए गए हैं।

गुरूवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। उच्चतम न्यायलय ने सुनवाई के दौरान कहा कि ‘पैदल चल रहे मजदूरों को जल्द आश्रय स्थल पर ले जाएं और उन्हें सारी सुविधाएं दें।’

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमें इस बात की चिंता है कि प्रवासी मजदूरों को घर वापस जाने के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हमने नोटिस किया है कि रजिस्ट्रेशन की प्रकिया, ट्रांसपोटेशन के साथ-साथ उनके खाने-पीने के इंतजाम में काफी खामियां हैं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को घर भेजने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।

सुनवाई के दौरान केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि अभी तक 91 लाख प्रवासियों को उनके घर भेजा जा चुका है। इनमें से 80 प्रतिशत के करीब बिहार और उत्तर प्रदेश के हैं।

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