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नेशनल

ओवैसी भी हरा लबादा ओढऩे की तैयारी में,बोले-अगर मैंने हरा रंग धारण किया तो कोई नहीं टिकेगा

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हैदराबाद। देश की राजनीति में आजकल एक मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ राहुल गांधी का मंदिर जाना। भाजपा लगातार इस मुद्दे को लेकर गुजरात चुनाव में उठाती रही और फायदा भी देखने को मिला। हालांकि इस बवाल में अब एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी कूद गए है।

उन्होंने इस धार्मिक मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है। एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि अगर उन्होंने अगर हरा रंग धारण किया तो कई रंग नहीं टिकेगे। उन्होंने पीएम मोदी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि जब हम हरा रंग पहनेंगे तो इसके आगे कोई रंग नहीं टिकेगा।

ओवैसी ने राहुल गांधी के मंदिर जाने को लेकर कई सवाल दाग दिया है। उन्होंने कहा कि राहुल किसी मस्जिद या दरगाह क्यों नहीं गए, यहां तक कि किसी मुस्लिम नेता के साथ कोई तस्वीर तक सामने नहीं आई। इसके जरिए ओवैसी ने यह स्पष्ट कर दिया कि राहुल गांधी ने मुसलमानों की अनदेखी की।

बता दें कि गुजरात चुनाव को ध्यान में रखकर राहुल ने मंदिरों का खूब दौरा किया और मुस्लिग संगठनों के कार्यक्रम से दूर रहे। औवैसी ने आगे कहा कि ‘आप करें तो कुछ नहीं, पर हम जब ग्रीन पहनेंगे तो पूरा हरा करेंगे इंशा अल्?लाह और हमारे हरे रंग के आगे कोई रंग नहीं टिकेगा, ना मोदी का रंग ना कांग्रेस का, किसी का रंग नहीं खाली हमारा रंग रहेगा… हरा, हरा हरा। कुल मिलाकर देश की कई राजनीति पार्टियां धार्मिक लबादा ओढ़े रहती है ताकि वोट का खेल चलता रहे। यूपी में भगवा रंग का पूरा खेल देखा जा सकता है जबकि इससे पूर्व सपा की सरकार में हरा और लाल जबकि बसपा का नीला रंग देखा जा सकता है। वोट के लिए कई पार्टियां मौके-मौके पर अपना रंग बदलने में माहिर है।

 

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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