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क्रिकेटर की शादी : भुवी का सेहरा लगा सुहाना तो नूपुर का दिल हुआ दीवाना

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लखनऊ। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार गुरुवार को शादी रचाई। क्रिकेट की पिच पर बल्लेबाजों को चारों-खाने चित करने वाले भुवनेश्वर कुमार आखिरकार प्यार की पिच पर क्लीन बोल्ड हो गए। उनको क्लीन बोल्ड करने वाली नूपुर है। अपने बेटे के माथे पर सेहरा देखने की ललक हर मां को होती है। भुवी का मां भी अपने बेटे को दूल्हा बनता देख उनकी खुशी कोई ठिकाना नहीं रहा।

कोलकाता टेस्ट में अपनी गेंदबाजी की बदौलत श्रीलंकाई बल्लेबाजों की कमर तोडऩे वाले भुवी अपने घर मेरठ पर आज एकदम बदले हुए नजर आये। घर पर चारों ओर खुशी का नगाड़ा बज रहा था।

बुधवार से ही भुवी अपनी शादी की तैयारियों में लगे रहे। बुधवार की शाम भुवी के लिए खास बनी रही क्योंकि शादी से पूर्व कई रस्में भी आयोजित हुई, मेहंदी और महिला संगीत कार्यक्रम में लोक गीत, पंजाबी गीत और हिंदी फिल्मी गीतों पर भुवी का पूरा परिवार झूम रहा था।
इसके बाद वह घंडी भी आ गई जिसके लिए भुवी लम्बा इंतेजार कर रहे थे।

दरअसल गुरुवार को असली कार्यक्रम यानी शादी के लिए भुवी को तैयार होना था। रात में कई अनोठी रस्मों के बाद भुवी अपनी बचपन की दोस्त के साथ सात जन्मों के बंधन में बंधने को तैयारी में थे। बाराती सजने लगे और दूल्हा भी अपनी तैयारी के अंतिम रूप देने में लगे रहे। गुरुवार की सुबह भुवी की बारात उनके घर गंगानगर स्थित आवास से बड़ी धूमधाम से निकली।

शेरवानी में भुवी एकदम फब रहे थे। इकलौते बेटे को परिणय सूत्र में बंधवाने निकले पिता किरणपाल और उनकी मां के चेहरे की रंगत भी अपने उफान पर थी। माता-पिता, बड़ी बहन रेखा और परिजन गाजे-बाजे के साथ घर से ठुमके लगाते हुए कालोनी के शिवमंदिर तक पहुंचे और वहां पूजा-पाठ किया।

इसके बाद भुवी कार से दिल्ली-देहरादून हाईवे स्थित होटल ब्रावुरा पर पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया है। नूपुर का पूरा परिवार इस मौके पर भुवी के स्वागत के लिए पलक-पावड़े बिछाकर इंतजार में खड़े थे। भुवी-नुपूर का वैवाहिक कार्यक्रम दिन में ही रखा गया है। बारातियों के जोरदार स्वागत होने के बाद वैवाहिक कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो गई। विवाह सम्पन्न होने के बाद शाम को विदाई की रस्म भी पूरी कर ली गई।

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आत्मरक्षा के लिए बच्चे और महिलाएं जरूर सीखें कुंग फू: शिशिर

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लखनऊ। खेल से स्वस्थ और फिट रह सकते हैं। खेलों के प्रति बच्चों का रुझान कम होना अच्छे संकेत नहीं हैं। आज बच्चों का खेल मैदान से नाता कम होने का खामियाजा समाज को भुगतान पड़ रहा हैं। बच्चियों और महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ रहे हैं, ऐसी दशा में बच्चियों और महिलाओं को अपनी रक्षा स्वयं करने के लिए आत्म रक्षा की कला कुंग फू को सीखना चाहिए।

यह बातें सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक शिशिर ने 13वीं राष्ट्रीय कुंग फू प्रतियोगिता के आज दूसरे दिन बालिकाओं की सांडा फाइट के उद्घाटन के मौके पर कही।

उन्होंने कहा कि छोटे छोटे बच्चों को कुंग फू खेल खेलते देख अपना बचपन याद आ गया। कुंग फू फेडरेशन ऑफ इंडिया का यह प्रयास काफी सराहनीय है। उन्होंने ने कहा कि इस आत्म रक्षा के खेल को हर स्तर से बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

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