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आध्यात्म

जानें क्यों दिवाली के दिन भूल से भी भूलकर नहीं करने चाहिए ये पांच काम

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दीपावली का त्यौहार नजदीक आ रहा है। लोग काफी सरगर्मी के साथ इस पर्व के आने का इंतज़ार कर रहे है। खुशियों और रौशनी के इस त्यौहार को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ये त्यौहार हिन्दू धर्म के साथ साथ कई और धर्मों के लिए भी आस्था का विषय है।

इस पर्व पर लक्ष्मी देवी की विशेष पूजा पाठ भी किया जाता है। ऐसा माना जाता है की ये त्यौहार इंसान के जीवन में सुख समृधि लाता है। लेकिन आपको बता दें की कुछ ऐसे काम होते हैं जो दिवाली में नहीं करने चाहिए जिसके करने से देवता और हमारे पूर्वज क्रोधित होते हैं ।

  •  दिवाली के दिन मनुष्य को क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए क्योंकि महालक्ष्मी को क्रोध और लोभ जिस घर में होता है उस घर में नहीं जाती है इसीलिए मनुष्य को चाहिए कि दिवाली में वह अपने क्रोध को शांत रखें ।
  • दिवाली के दिन हर कोई घर को स्वच्छ करता है और सारे दुख कलेश नेगेटिव एनर्जी बाहर चली जाती है।
  •  दीपावली के दिन कोई भी तरह का नशा नहीं करना चाहिए नशा करने से मनुष्य को व्यापार में या फिर जॉब में बहुत बड़ा नुकसान होता है
  • दीपावली के दिन सूर्य उदयहोने से पहले उठ जाना चाहिए और भगवान की पूजा करनी चाहिए
  • दिवाली की शाम को किसी भी मनुष्य को सोना नहीं चाहिए सोने के वजह से घर के वातावरण में नरेंद्र आ जाती है जिससे क्रोध और लोभ होता है इसीलिए शाम के समय सोना नहीं चाहिए

 

कृपालु महाराज

जेकेपी ने की 10 हजार लोगों की मदद, बांटी दैनिक उपयोगी वस्तुएं

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मनगढ़। जगद्गुरु कृपालु परिषत् द्वारा वर्ष भर लोकोपकारी गतिविधियां चलाई जाती हैं। संस्था द्वारा वर्ष में अनेक बार निर्धन व्यक्तियों, अनाश्रित महिलाओं व अभावग्रस्त विद्यार्थियों को दैनिक उपयोगी वस्तुएं दान-स्वरूप प्रदान की जाती हैं। इन लोकोपकारी गतिविधियों को नई राह प्रदान करते हुए दिनांक 4 अगस्त 2019 को भक्ति धाम, मनगढ़ द्वारा मनगढ़ एवं आस-पास के अभावग्रस्त क्षेत्र के निर्धन ग्रामवासियों को दैनिक उपयोगी वस्तुओं का निःशुल्क वितरण किया गया।

जगद्गुरु कृपालु परिषत् की अध्यक्षाओं सुश्री डाॅ विशाखा त्रिपाठी जी, सुश्री डाॅ श्यामा त्रिपाठी जी एवं सुश्री डाॅ कृष्णा त्रिपाठी जी द्वारा निःशुल्क वितरण के अन्तर्गत लगभग 10,000 निर्धन गरीबों को एक-एक स्टील का भगोना एवं तकिया प्रदान की गई। सम्पूर्ण कार्यक्रम राधे गोविन्द, गोविन्द राधे के मधुर संकीर्तन के मध्य सम्पन्न हुआ। इससे पूर्व 27 मार्च 2019 को लगभग 10,000 निर्धन ग्रामवासियों को एक-एक स्टील की परात, तौलिया एवं टाॅर्च प्रदान की गई।

संस्था के तीन प्रमुख केंद्रों (मनगढ़, बरसाना व वृन्दावन) में निर्धन वर्ग की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए अनेक वर्षों से इस प्रकार के वितरण कार्य संपन्न किए जाते रहे हैं। जेकेपी का उद्देश्य क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में रह रहे निर्धनों की दैनिक जरूरतें पूरी करना है ताकि उनका जीवन सुचारु रूप से चल सके। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की सुपुत्रियाँ डॉ विशाखा त्रिपाठी, डॉ श्यामा त्रिपाठी और डॉ कृष्णा त्रिपाठी जो जेकेपी की अध्यक्ष भी हैं, महाराज जी के दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए उन्हीं की तरह निरन्तर सामाजिक उत्थान के कार्यों में पूरी तरह से समर्पित हैं।

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