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नेपाल में हुलिया बदलकर पुलिस को चकमा दे रही हनीप्रीत

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नई दिल्ली। गुरमीत राम रहीम की सबसे बड़ी राजदार हनीप्रीत नेपाल में देखी गई है। बताया जा रहा है कि हनीप्रीत के साथ तीन गाडिय़ों का काफिला था। जब तक नेपाल और वहां गई हरियाणा पुलिस की टीम हनीप्रीत तक पहुंच पाती वह पोखरा की तरफ भाग निकली।

सूत्रों के मुताबिक हनीप्रीत को लेकर नेपाल पुलिस भी औपचारिक तौर पर हरकत में आ गई है। मोस्ट वांटेड घोषित हो जाने के बाद अब नेपाल पुलिस को भी गिरफ्तार करने का आधार मिल गया है। नेपाल पुलिस ने भी हनीप्रीत को गिरफ्तार करने के लिए सभी थानों में आदेश दिए हैं।

वहीं कुछ मीडिया रिपोट्र्स में दावा किया है कि हनीप्रीत नेपाल के महेंद्र नगर में छिपी है। वह वहां पिछले एक सप्ताह से रुकी हुई है। उसे नेपाल नंबर की गाड़ी से आते-जाते देखा गया है। सूत्रों का दावा है कि हनीप्रीत ने अपना हुलिया बदल लिया है, ताकि उसकी पहचान न हो पाए। उसकी खोज के लिए पुलिस की 10 टीमें बनाई गई हैं।

डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की गोद ली बेटी हनीप्रीत को लेकर हरियाणा के डीजीपी बीएस संधू ने सोमवार को कहा था कि पुलिस और एसआईटी कई राज्यों में उसकी तलाश कर रही है। हालांकि, उसके नेपाल में होने की हमें कोई जानकारी नहीं मिली है।

बताते चलें कि हनीप्रीत 25 अगस्त की शाम से ही फरार है। दरअसल 2015 में नेपाल में आए भूकंप के दौरान राम रहीम ने इस इलाके में राहत अभियान चलाया था। तभी से यहां उसके काफी भक्त भी हैं। बताया जा रहा है कि हनीप्रीत उन्हीं भक्तों का इस्तेमाल कर पुलिस को चकमा दे रही है।

नेशनल

मंदिर का सुरक्षा गार्ड या पुलिस, किसके हिस्से में जाएंगे पांच लाख

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कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिस वालों का हत्यारा विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया गया है। सात दिनों तक पुलिस से आंख मिचौली का खेल खेल रहा विकास दुबे आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। अब सभी की नजरें उस इनामी राशि पर टिक गई हैं जो विकास दुबे को पकड़ने वाले को मिलने वाली थी।

विकास दुबे पर पहले 25 हजार का इनाम था, जिसको बढ़ाकर 50 हजार, फिर 1 लाख और फिर 2.5 लाख किया गया था। इसके बाद विकास दुबे पर इनामी राशि बढ़कर पांच लाख कर दी गई थी। अब सवाल ये उठता है है कि ये पांच लाख रु मंदिर के उस गार्ड को मिलेंगे जिसने विकास दुबे को सबसे पहले पहचाना था या फिर उज्जैन पुलिस जिसने उसे गिरफ्तार किया।

मंदिर परिसर की ओर से देखा जाए तो सवाल यह उठ रहा है कि अगर सुरक्षाकर्मियों ने ध्यान नहीं दिया होता तो शायद विकास वहां से भी भाग निकलता। इनामी राशि मध्यप्रदेश पुलिस को भी दी जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो मंदिर परिसर का सवाल करना भी वाजिब होगा। हालांकि इसमें पुलिस का पक्ष भी अपने आप में मजबूत है कि अगर पुलिस चौकन्नी नहीं रहती तो मंदिर परिसर द्वारा दी गई सूचना के बावजूद विकास फरीदाबाद की तरह वहां से भी भाग सकता था।

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