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EC ने शरद को दिया जोरदार झटका, नीतीश के नाम किया जदयू

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नई दिल्ली। चुनाव आयोग (इलेक्शन कमीशन) ने असली-नकली जदयू का फैसला कर दिया है। आयोग ने मंगलवार को पार्टी के बागी शरद यादव के जदयू के सिंबल पर दावे को खारिज कर दिया है। इसके साथ अब यह तय हो गया है कि नीतीश कुमार का जदयू ही असली है।

चुनाव आयोग ने साफ कर दिया कि जदयू और पार्टी का चुनाव चिह्न नीतीश के पास ही रहेगा। आयोग ने शरद यादव की याचिका को तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया है। आयोग ने यादव को भेजे अपने संदेश में कहा है कि उन्होंने याचिका में अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज पेश नहीं किए हैं, इसलिए उनकी याचिका खारिज की जाती है।

इस निर्णय के साथ ही अब शरद यादव के राजनीतिक भविष्य पर चर्चाएं होने लगी हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही पार्टी ने राज्यसभा से बाहर करने के लिए अपनी मांग पर आगे कदम उठाएगी।

जदयू के महासचिव संजय झा ने बताया कि पार्टी ने चुनाव आयोग से मिलकर दावे से संबंधित दस्तावेजी सबूत दाखिल किए। पार्टी ने बिहार के 71 विधायकों तथा 30 विधान पार्षदों के शपथपत्र दिए। साथ ही दो लोकसभा सांसदों और सात राज्यसभा सांसदों के शपथ पत्र भी दिए। सभी ने मुख्यमंत्री व पार्टी सुप्रीमो नीतीश कुमार के प्रति समर्थन जताया।

मालूम हो कि शरद यादव के खिलाफ जदयू ने मोर्चा खोला हुआ है। इससे पहले सांसद आरसीपी सिंह की अगुवाई में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू से मुलाकात कर शरद की राज्यसभा की सदस्यता खत्म करने की मांग की थी।

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दिल्ली हिंसा: पुलिस को फटकार लगाने वाले जज का हुआ तबादला, कांग्रेस ने उठाए सवाल

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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को फटकार वाले जज एस मुरलीधर का तबादला दिल्ली हाई कोर्ट से पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में कर दिया गया है। सुप्रीम कॉलिजियम ने बीती 12 फरवरी को जस्टिस मुरलीधर के तबादले को लेकर सुझाव दिया था जिसके बाद बुधवार को इससे संबंधित नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे के साथ विचार-विमर्श करने के बाद फैसला लिया है।

वहीँ, जज के तबादले को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस फैसले को दुखद बताया। इसबीच उनके भाई तथा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने न्यायमूर्ति लोया के याद करते हुए केंद्र सरकार पर कटाक्ष किया, जिनकी मौत पर राजनीतिक विवाद हुआ था। प्रियंका ने ट्वीट किया, “वर्तमान स्थिति को देखते हुए न्यायमूर्ति मुरलीधर का आधी रात को ट्रांसफर चौंकाने वाली घटना नहीं है, लेकिन यह दुखद और शर्मनाक है।”

स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए उन्होंने आरोप लगाया, “लाखों भारतीय नागरिकों को ईमानदार न्यायपालिका पर विश्वास है, लेकिन न्याय को विफल करने और उनके विश्वास को तोड़ने का सरकार का प्रयास दुस्साहस भरा है।” इसी दौरान उनका साथ देते हुए राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर दिया, “बहादुर जज लोया की याद आई, जिनका ट्रांसफर नहीं हुआ था।” न्यायाधीश बी.एच. लोया सोहराबुद्दीन मामले की सुनवाई कर रहे थे, जब दिसंबर 2014 में उनकी नागपुर में संदिग्ध मौत हो गई थी। कानून एवं न्याय मंत्रालय ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर का स्थानांतरण (ट्रांसफर) पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट कर दिया था।

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