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शरद के पर पूरी तरह कतरने की तैयारी में जदयू, उपराष्ट्रपति से की मुलाकात

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नई दिल्ली। बिहार में आए सियासी तूफान के बाद भी जदयू में जंग थमती नहीं दिख रही है। बागी हो चुके नेता शरद यादव के पर कतरने के लिए पार्टी ने एडी-चोटी का जोर लगा दिया है। शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता को रद्द करने के लिए अब पार्टी नेताओं ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मुलाकात की। जदयू के राज्यसभा में संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह और महासचिव संजय झा ने शरद यादव की सदस्यता खत्म करने की मांग करते हुए उपराष्ट्रपति को पत्र सौंपा।

उपराष्ट्रपति को शरद यादव की पार्टी विरोधी गतिविधियों का सबूत सौंपा गया और उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग की गई। राज्यसभा के नियमों के शेड्यूल 10 के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की गई। इसमें किसी भी सदस्य के स्वेच्छा से सदस्यता छोडऩे पर सदस्यता रद्द होने का प्रावधान है।

जदयू महासचिव संजय झा ने बताया कि शरद को पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर यह पत्र लिखा गया था कि वे राजद की रैली में शामिल न हों। पार्टी के निर्देश का उल्लंघन कर उन्होंने राजद की रैली में मंच साझा किया। यह संविधान के दसवें अनुच्छेद के तहत स्वत: दल त्याग का मामला बनता है। पूर्व में ऐसे मामलों में सदस्यता खत्म होने के दृष्टांत हैं।

बता दें कि 2015 में बिहार में जदयू और राजद ने साथ में चुनाव लड़ा था और भारी जीत हासिल की थी। इसके बाद जदयू के नीतीश कुमार सीएम और राजद कोटे से तेजस्वी यादव को डिप्टी सीएम बनाया गया। जुलाई में नीतीश ने राजद से अलग होकर भाजपा के सहयोग से सरकार बना ली। इसके बाद जदयू के शीर्ष नेता शरद यादव ने नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

इसके बाद जदयू ने शरद यादव को राज्यसभा में पार्टी के नेता पद से हटा दिया था। बाद में शरद यादव ने पिछले दिनों राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की महारैली में भी हिस्सा लिया था। इसके बाद जदयू ने कहा था कि रैली में भाग लेकर शरद यादव ने खुद से पार्टी की सदस्यता का त्याग कर दिया है।

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मंदिर का सुरक्षा गार्ड या पुलिस, किसके हिस्से में जाएंगे पांच लाख

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कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिस वालों का हत्यारा विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया गया है। सात दिनों तक पुलिस से आंख मिचौली का खेल खेल रहा विकास दुबे आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। अब सभी की नजरें उस इनामी राशि पर टिक गई हैं जो विकास दुबे को पकड़ने वाले को मिलने वाली थी।

विकास दुबे पर पहले 25 हजार का इनाम था, जिसको बढ़ाकर 50 हजार, फिर 1 लाख और फिर 2.5 लाख किया गया था। इसके बाद विकास दुबे पर इनामी राशि बढ़कर पांच लाख कर दी गई थी। अब सवाल ये उठता है है कि ये पांच लाख रु मंदिर के उस गार्ड को मिलेंगे जिसने विकास दुबे को सबसे पहले पहचाना था या फिर उज्जैन पुलिस जिसने उसे गिरफ्तार किया।

मंदिर परिसर की ओर से देखा जाए तो सवाल यह उठ रहा है कि अगर सुरक्षाकर्मियों ने ध्यान नहीं दिया होता तो शायद विकास वहां से भी भाग निकलता। इनामी राशि मध्यप्रदेश पुलिस को भी दी जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो मंदिर परिसर का सवाल करना भी वाजिब होगा। हालांकि इसमें पुलिस का पक्ष भी अपने आप में मजबूत है कि अगर पुलिस चौकन्नी नहीं रहती तो मंदिर परिसर द्वारा दी गई सूचना के बावजूद विकास फरीदाबाद की तरह वहां से भी भाग सकता था।

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