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कैसे दनादन डाउनलोड हो रही है एक सेकेंड में तीन HD फिल्में, जानें क्या है तकनीक!

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अब एक ऐसा वायरलेस नेटवर्क आ रहा है, जिसकी मदद से वाई-फाई की स्पीड को 300 गुना तक बढ़ाया जा सकेगा। ऐसा मानना डच रिसर्चर्स का है। इस वायरलेस नेटवर्क में इन्फ्रारेड रेज का इस्तेमाल किया जाता है।

एंडहोवेन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी के प्रोफेसर टॉन कूनन ने कहा, “दरअसल हम रोशनी की किरणों का इस्तेमाल वायरलेस तरीके से इन्फॉर्मेशन ट्रांसफर करने के लिए कर रहे हैं जहां हर किरण हाई-कैपेसिटी चैनल की तरह काम कर रही है।

यहां काम ऑप्टिकल फाइबर की तरह ही हो रहा है, बस इसमें फाइबर की जरूरत नहीं है। इस वक्त हम हर सेकंड 112 जीबी तक ट्रांसफर कर पा रहे हैं।”

प्रोफेसर टॉन कूनन की बात पर गौर किया जाए तो 112 जीबी डाटा 3 फुल लेंथ एचडी फिल्मों के बराबर है। यह 1 सेकेंड में डाउनलोड होता है।

लाइट एंटीना अलग-अलग ऐंगल्स पर कई सारी अदृष्य वेवलेंथ्स को रेडिएट करते हैं। ऐसे में अगर आपका स्मार्टफोन किसी एंटीना की साइटलाइट से दूर है तो वो अपने आप ही दूसरे से कनेक्ट हो जाएगा।

सबसे अहम बात की इस सिस्टम का मेंटेनेंस और पावर यूज की समस्या नहीं आती है। इसमें हर यूजर के पास अलग एंटीना होता है।

 

 

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भारत के इस राज्य में तैयार हुआ कोरोना से लड़ने वाला रोबोट, डॉक्टरों में खुशी

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pic - ANI

कोरोना महामारी के बीच एक आशा की खबर सामने आ रही इंजीनीयरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्र ने घर बैठे एक ऐसा रोबोट तैयार किया है ,जो कोरोना महामारी में इन डाक्टरों की मदद तो करेगा ही साथ ही उन्हें इस बीमारी से बचायेगा और कोरोना पीड़ित मरीजों की भी सेवा करेगा।

महासमुंद जिले के गुडरूपारा निवासी इंजीनियरिंग के छात्र योगेश कुमार साहू ने अपने दो मित्रो ( प्रवीण वर्मा और रिषिकेश यादव ) की मदद से बनाया है। योगेश छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद टेक्निकल यूनीर्वसिटी भिलाई का बीई अंतिम वर्ष का छात्र है।

इस रोबोट को बनाने के लिए योगेश ने मेटल शीट, पीवीसी पाइप, लकड़ी, ग्यारह मोटर, माइक्रो फोन ,स्पीकर और इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड का उपयोग किया। रोबोट के आँखो में एलईडी लाईट का उपयोग किया। रोबोट किसी भी चीज को उठाकर एक जगह से दूसरी जगह ले जा सके इसके लिए रोबोट को मोबाईल फोन से कनेक्ट किया।

इस प्रकार रोबोट तैयार हो गया और रोबोट को बनाने में 5 हजार रूपये का खर्च आया। इस रोबोट का उपयोग अस्पतालों में मरीजों की देखभाल में किया जा सकता है,जो कोरोना जैसे बीमारियों से ग्रसित हो। इसका उपयोग कारखानो में मानेटरिंग, आर्मी में, केमिकल स्प्रे में, सुरंग में, न्यूक्लियर प्लांट में एवं लैंड माईन का पता लगाने और बम को निष्क्रिय करने में भी किया जा सकता है।

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