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हेल्थ

युवाओं में बढ़ रही पैर सूजने की बीमारी

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नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)| एक ताजा शोध में यह बात सामने आई है कि ‘वैरिकोज वेन्स’ यानी पैरों की नसें सूजने की बीमारी युवाओं में चिंता का कारण बन रही है। करीब 7 प्रतिशत युवा इस स्थिति से परेशान हैं। इस रोग से महिलाओं को चार गुना अधिक खतरा रहता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अनुसार, पैरों की नसें सूजने के कुछ प्रमुख कारण हैं शारीरिक व्यायाम न करना, एक ही जगह देर तक बैठे रहना, तंग कपड़े और ऊंची एड़ी के जूते पहनना।

यह रोग तब होता है, जब निचले अंगों की नसों के वाल्व क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। नतीजतन, निचले अंगों से हृदय की ओर रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। इससे नसों में खून एकत्रित होता रहता है और पैरों में सूजन आ जाती है। यह रोग आमतौर पर पैरों में पाया जाता है।

आईएमए के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, पैर में कई वाल्व होते हैं जो रक्त को हृदय की दिशा में प्रवाहित होने में मदद करते हैं। वैरिकोज अल्सर दोनों पैरों में हो सकता है। जब ये वाल्व क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो सूजन, दर्द, थकान, खुजली और रक्त के थक्के बनना शुरू हो होता है। यह एक धीमी लेकिन परेशानी वाली बीमारी है।

उन्होंने कहा कि लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं, जिस वजह से लोग इस पर ध्यान नहीं देते। इससे जटिलता का सामना करना पड़ सकता है और इलाज मुश्किल होता जाता है। इसका इलाज समय पर कराना जरूरी है, वरना अल्सर विकसित हो सकता है।

वैरिकोज नसों की शुरुआत पर प्रभाव डालने वाले कुछ कारक आयु, लिंग, आनुवंशिकी, मोटापे और लंबी अवधि के लिए पैरों की स्थिति हैं। वृद्धावस्था में भी नसों में टूट फूट हो सकती है। गर्भावस्था, पूर्व माहवारी और रजोनिवृत्ति कुछ कारक हैं जो महिलाओं में वैरिकोज नसों को प्रभावित करते हैं।

डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया, इस कंडीशन के बारे में कई लोगों में जागरूकता की कमी है। चिंता की बात तो यह है कि इस रोग की अनदेखी हो जाती है और लोग समय पर उपचार नहीं कराते। समय पर इलाज न होने से अल्सर, एक्जिमा और उच्च रक्तचाप हो सकता है। उपचार समय पर दिया जाना चाहिए, बशर्ते रोगी को कोई परेशानी न हो। कुछ रोगियों को पैरों की खूबसूरती के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी भी करानी पड़ सकती है।

वैरिकोज नसों की परेशानी से बचने के लिए कुछ उपाय :

– नियमित रूप से पैदल चलने से पैरों में रक्त परिसंचरण बढ़ेगा।

– वजन और आहार को नियंत्रित करें। पैरों पर दबाव से बचने के लिए अधिक वजन ठीक नहीं। नमक कम ही खाएं।

– आरामदायक कपड़े और जूते पहनें।

– पैरों को ऊपर उठाइए। अपने दिल की ऊंचाई तक पैरों को ऊपर उठाइए। लेट कर अपने पैरों के नीचे तीन-चार तकिये भी रख सकते हैं।

– लंबे समय तक बैठना या खड़े रहना उचित नहीं।

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नेशनल

अगर आप देर रात तक जागते हैं तो आपके सर पर मंडरा रहा है मौत का खतरा, वजह जान चौंक जाएंगे आप

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देर रात तक जागना अब लोगों की आदत बन चुकी है। स्मार्टफोन के इस्तेमाल ने लोगों की दिनचर्या पर अच्छा खासा प्रभाव डाला है। लोग देर रात तक इंटरनेट पर सर्फिंग करते गुजारते हैं। देर रात जागने से सुबह जल्दी नींद नहीं खुलती। देर से जागने को लोग अब स्टेटस सिंबल मान रहे हैं।

साभार – इंटरनेट

आपको बता दें आपकी यह आदत आपके लिए जानलेवा साबित होगी। ताजातरीन अध्ययन की माने तो देर रात तक जगने वाले ऐसे लोग अपनी मौत को न्यौता भेज रहे हैं। नतीजे बताते हैं कि ऐसे लोग जो देर रात तक जागते हैं और सुबह देर से उठते हैं, वे जल्दी मरते हैं।

साभार – इंटरनेट

जी हां, यह सनसनीखेज खुलासा हम नहीं करे हैं, बल्कि ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने किया है। क्योंकि देर तक उठने से शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। साथ ही शरीर की जैविक घड़ी भी डिस्टर्ब हो जाती हैं। ऐसे लोग जल्दी सोने व जल्दी उठने वाले लोगों की तुलना में मृत्यु का खतरा बहुत अधिक पाल लेते हैं। क्योंकि जल्दी सोने और जल्दी उठने के फायदे तो जगजाहिर है।

साभार – इंटरनेट

समस्त धार्मिक ग्रंथ और साइंसदान यही सलाह देते हैं कि रात को 10 बजे सो जाओ और सुबह 4 बजे ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाओ। अगर आप भी अक्षय कुमार की तरह ऐसा ही करते हैं तो आपको स्वस्थ और बाहुबली होने से कोई नहीं रोक सकता है। मगर इसके उलट अगर आप निशाचर की गिनती में आते है तो फिर अपने दिन गिनना शुरू कर दीजिए। क्योंकि देर से उठकर आप अपना जीवन कम कर रहे हैं।

साभार – इंटरनेट

ब्रिटेन में करीबन पांच लाख प्रतिभागियों पर यह शोध किया गया है। परिणाम बताते हैं कि देर रात तक जागने और सुबह देरी से उठने की वजह से जल्दी मरने की संभावना करीब 10 प्रतिशत अधिक बढ़ जाती है। ‘द जर्नल क्रोनोबायोलॉजी इंटरनेशनल’ नामक शोध पत्रिका में ये नतीजे प्रकाशित हुए हैं।

 

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