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नीतीश का शरद पर वार, बोले- भाजपा को स्वीकारें या अपना रास्ता देखें

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नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने इशारों में शरद यादव पर निशाना साधते हुए कहा है कि यदि किसी को भाजपा के साथ गठबंधन से नाराजगी है, तो वह बाहर जाने के स्वतंत्र है। उन्होंने यह बयान पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव की नाराजगी की खबरों के बीच दिया है।

जनता दल यूनाइटेड के दो योद्धाओं के बीच चल रहे मनमुटाव पर नीतीश ने कहा कि शरद यादव को या तो जेडीयू-भाजपा की दोस्ती को स्वीकार करना चाहिए, अथवा उन्हें अपना अलग रास्ता चुन लेना चाहिए। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बात कही। इसके अलावा नीतीश ने पीएम मोदी से मुलाकात को औपचारिक बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि अगस्त में विकास के मुद्दों पर फिर मुलाकात होगी।

उन्होंने कहा, ‘शरद यादव अपना फैसला लेने के लिए आजाद हैं। जहां तक पार्टी का सवाल है पार्टी ने अपना फैसला ले लिया है। यह फैसला सिर्फ मेरी इच्छा पर निर्भर नहीं है, इसपर पूरी पार्टी की सहमति है। मैंने पहले भी यह साफ कर दिया था, लेकिन फिर भी वह अपनी राय जाहिर करना चाहते हैं, तब वह इसके लिए आजाद हैं।’

गौरतलब है कि शरद यादव नीतीश के महागठबंधन छोडक़र बीजेपी के साथ सरकार बनाने से खफा हैं। शरद तीन दिन की बिहार यात्रा पर निकले हैं। वह लोगों को बता रहे हैं कि महागठबंधन के बिखरने से बिहार की 11 करोड़ जनता का भरोसा टूटा है।

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CBI जाँच क्यों नहीं, UP में हजारों करोड़ का सरकारी धन डकार गए फर्जी शिक्षक

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देश में शिक्षकों की नियुक्ति में सबसे बड़े घोटाले का खुलासा यूपी में हुआ है। बीते वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग में हजारों शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों से सरकारी नौकरी न सिर्फ हथियाई बल्कि हजारों करोड़ का वेतन भी हजम कर डाला है। यूपी में एसआईटी और एसटीएफ की शुरूआती जांच में जो खुलासे हो रहे हैं उससे हर कोई दंग है। कार्रवाई के नाम पर बड़े अफसर सिर्फ एफआईआर और वेतन वसूली दिखाकर अपनी गर्दन बचाने की जुगत में हैं। हकीकत यही है प्रदेश में शिक्षा विभाग को माफिया के हाथों पिछली सरकारों में मानो गिरवी ही रख दिया गया। सवाल ये भी है आखिर जिन अफसरों-नेताओं-मंत्रियों के सिंडिकेट ने यूपी के शिक्षा महकमे ने अरबों की रिश्वत लेकर बीते एक दशक के दौरान हजारों फर्जी नियुक्तियां की हैं वो कब जेल की सलाखों के पीछे जायेंगे। सबसे बड़ा सच ये भी है कि इन भ्रष्टों के रिश्तेदारों को भी सरकारी शिक्षकों की नौकरियां रेवड़ियों की तरह बांटी गयी हैं।
यूपी में आगरा के भीमराव अम्बेडकर विश्विद्यालय से जारी 2823 शिक्षकों की डिग्री फर्जी पाई गयी है

up fake degree scam

जिन्होंने बेसिक शिक्षा महकमे के अधीन परिषदीय स्कूलों में नियुक्ति पाई थी। भर्तियां वर्ष 2004-2005 से लेकर वर्ष 2016 तक पूरे प्रदेश में की गयी है। फिलहाल 930 शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है 497 शिक्षकों पर विभाग ने कार्रवाई का डंडा चलाया है वहीं 1427 शिक्षकों से वेतन वसूली की तयारी है लेकिन बेसिक शिक्षा महकमे के आंकड़ों में बड़ा झोल भी है। दरअसल आगरा के भीमराव आबेडकर विश्विद्यालय से डिग्री लिए एक हजार से ज्यादा शिक्षक अपने दस्तावेजों को असली बता रहे हैं डिग्रियां वाकई असली हैं या नकली। इसकी रिपोर्ट सरकार जारी करने से क्यों हिचक रही है
एसआईटी जांच में हुए इस हैरतअंगेज खुलासे के बाद अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने फर्जी शिक्षकों से वसूली करने व एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जिलों को जारी किये हैं हर शिक्षक से औसतन 60 लाख की वेतन वसूली होना तय है। करीब नौ सौ करोड़ की बड़ी सरकारी रकम इन फर्जी शिक्षकों से वसूली जायेगी।

जल्द ही प्रदेश के अफसर अपनी रिपोर्ट शासन को सौपेंगे। एसआईटी के पास शिक्षा महकमे के घोटालों की कई और जांचें भी हैं दरअसल डिजिटल तकनीक से यूपी के शिक्षा महकमे में रोजाना नए घोटालों का खुलासा हो रहा है परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों का डाटा मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप पर अपलोड कराने के बाद फर्जीवाड़ों के नए किस्से सामने आये। पूरा खेल 2008 से 2019 के बीच अंजाम दिया गया है मानव संपदा पोर्टल पर 15 जुलाई तक डाटा सत्यापित होने के बाद करीब 5 हजार से ज्यादा शिक्षकों के दस्तावेजों में गड़बड़ियां आना तय माना जा रहा है एसआईटी के अलावा एसटीएफ ने भी सीएम योगी के आदेश पर यूपी में हजारों शिक्षकों के दस्तावेजों में धांधलियों की जांच शुरू की है। हजारों शिक्षकों ने नियुक्ति के समय जो पैन नंबर दिया था वह उसी नाम के किसी अन्य शिक्षक के नाम पर दर्ज था।

दरअसल शिक्षकों के द्वारा पैन नम्बर बदले जाने की जानकारी जैसे ही शासन को मिली। सभी अफसरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। सैकड़ों ऐसे मामले भी सामने आएं, जिनमें कई शिक्षकों का वेतन एक ही बैंक खाते में जा रहा था। बस फिर क्या था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घोटाले की जानकारी होते ही बेसिक शिक्षा विभाग के फर्जीवाड़े की जांच एसटीएफ को सौप दी गयी।
यूपी के शिक्षा महकमे के खेल बड़े निराले हैं हाल ही में अनामिका शुक्ला प्रकरण सामने आया था। जिसमे खुलासा हुआ कि अनामिका खुद तो बेरोजगार थी लेकिन उसके शैक्षिक दस्तावेजों पर 25 जिलों के कस्तूरबा स्कूलों में फर्जी शिक्षिकाएं नौकरी कर रही थी। एसटीएफ की जांच आगे बढ़ी तो शिक्षा माफिया के खेल का पर्दाफाश हो गया। खुद बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश दिवेदी ने भी इस गंभीर मामले पर सफाई पेश की थी।
योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा महकमे में फर्जीवाड़ों को देखने के बाद माध्यमिक और उच्च शिक्षा में भी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया शुरू की है इस सिलसिले में डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने हाल ही में सरकार की और से अपना पक्ष रखते हुए शिक्षा माफिया पर सख्ती की बात भी कही है लेकिन इस तरह के फर्जीवाड़ों से एक बात जरूर निकल कर सामने आ रही है आखिर क्यों उत्तरप्रदेश में शिक्षा विभाग को भिक्षा विभाग कहा जाता है

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