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ऑफ़बीट

एक गेंद पर बने 7 रन, बिना नो-वाइड और सिक्‍सर लगे

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नो बॉल, वाइड बॉल, फील्डर, बल्लेबाज

केंट और समरसेट के बीच खेले गए मैच में समरसेट के बल्लेबाज स्टीव डेविस ने एक गेंद पर 7 रन बना दिए। बांए हाथ के बल्लेबाज डेविस ने ऑफ साइड में शॉट मारकर तीन रन दौड़कर ले लिए। फील्डर ने गेंद विकेटकीपर सैम बिलिंग्स के हाथ में दी।

विकेटकीपर बिलिंग्स ने दूसरे छोर पर रन आउट का मौका देखते हुए थ्रो कर दिया। लेकिन सामने के छोर पर कोई भी फील्डर उस गेंद को रोक नहीं सका।

गेंद सीधा बाउंड्री के पार चली गई। अंपायर ने चार रन का सिग्नल दे दिया। कुल मिलाकर डेविस के खाते में 7 रन आए।

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बता दें कि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच 2006 के एशेज दौरे पर भी ऐसा ही वाकया सामने आया था। तब ऐंड्रू फ्लिंटॉफ की गेंद पर माइकल क्लार्क ने 7 रन बटोरे थे।

यहां देखें वीडियो––––

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धन्य हैं “धन” के इस दौर में ”सरस्वती” के नए साधक-संपादक…

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आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की ओर से रायबरेली में मनाए जाने वाले आचार्य स्मृति दिवस 2020 के अवसर पर इस वर्ष का प्रतिष्ठित डॉ राम मनोहर त्रिपाठी लोक सेवा सम्मान 40 वर्ष बाद इंडियन प्रेस प्रयागराज से पुनर प्रकाशित हुई सरस्वती पत्रिका के संपादक प्रोफ़ेसर देवेंद्र कुमार शुक्ला एवं अनुपम परिहार को संयुक्त रुप से समर्पित किया गया।

प्रोफ़ेसर देवेंद्र कुमार शुक्ला

कार्यक्रम में प्रोसेसर सुख अपरिहार्य कारणों से उपस्थित नहीं हो पाए। सरस्वती के सहायक संपादक अनुपम परिहार प्रयागराज से कार्यक्रम में प्रतिभाग करने पहुंचे थे। उन्होंने ही प्रोफेसर देवेंद्र शुक्ल का प्रतिनिधित्व भी किया। समिति के पदाधिकारियों ने सम्मान पत्र व प्रतीक चिन्ह एवं अंगवस्त्र के साथ ही सम्मान राशि प्रदान की।

सरस्वती के सहायक संपादक अनुपम परिहार

प्रोफ़ेसर देवेंद्र शुक्ला की सहमति से  अनुपम परिहार ने सम्मान के साथ दी गई धनराशि इंडियन प्रेस प्रयागराज के प्रबंधक सुप्रतीक घोष को सौंप दी। प्रधान संपादक देवेंद्र शुक्ला और सहायक संपादक अनुपम परिहार ने “सरस्वती” का संपादन अवैतनिक स्वीकार किया है। परिहार इसके पहले भी  प्रयागराज में एक व्याख्यान  में प्रतिभाग  करने पर  मिली धनराशि  इंडियन प्रेस को सौंप चुके हैं।

सरस्वती के संपादन के एवज में प्रधान संपादक एवं सहायक संपादक को “लक्ष्मी” स्वीकार नहीं है। हिंदी भाषी समाज में सरस्वती और आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी एक-दूसरे के पर्याय और पूरक माने गए हैं। आचार्य द्विवेदी ने सरस्वती के संपादन से प्राप्त धनराशि काशी नागरी प्रचारिणी सभा को दान में दे दी थी। हम भी आचार्य द्विवेदी की उसी परंपरा का पालन करने का पूरा प्रयास करेंगे।

 

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