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अरुणाचल में IAF हेलीकॉप्टर का मलबा मिला, चार शव बरामद

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नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में मंगलवार को दुर्घटनाग्रस्त हुए भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के हेलीकॉप्टर का मलबा व इसमें सवार रहे तीन क्रू सदस्यों व एक पुलिसकर्मी का शव बरामद कर लिया गया है। पापुम पारे जिले में हुई दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए कोर्ट आफ इंक्वायरी के आदेश दिए गए है।

मुख्यमंत्री पेमा खांडु ने इस दुर्घटना पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना की पुष्टि से लोगों को धक्का लगा है और राज्य जो पहले ही प्राकृतिक आपदा से सामान्य जीवन की तरफ लौटने को संघर्ष कर रहा था, उसमें उदासी फैली है।

रक्षा विभाग के एक बयान में गुरुवार को कहा गया कि भारतीय वायु सेना, पुलिस, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल व सेना के संयुक्त बचाव दल के तलाशी अभियान के दौरान अरुणाचल प्रदेश पुलिस टीम ने बुधवार की शाम को हेलीकॉप्टर के मलबे को तलाशा। मलबा और शव इटानगर से तीस किलोमीटर दूर सोफो युहा के होस्ताल्लम गांव में मिले।

बचाव दल गुरुवार की सुबह दुर्घटनास्थल पर अरुणाचल प्रदेश पुलिस के साथ पहुंचे और मलबे को बरामद किया। दल में आईएएफ के गार्ड कमांडो, चिकित्सा टीम, सेना व एनडीआरएफ कर्मी शामिल थे।

आईएएफ ने कहा, “अब तक तीन कर्मियों के शव बरामद हो चुके है। घटना के कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।”

क्रू में विंग कमांडर एम.एस. ढिल्लन, फ्लाइट लेफ्टिनेंट पी.के.सिंह, फ्लाइट इंजीनियर सार्जेट गुज्जर शामिल थे। इन्होंने भारतीय रिजर्व बलाटियन के सदस्य नाडा उम्बिंग के साथ मंगलवार को सांगली के निकट पिलपुतु हेलीपैड से उड़ान भरी थी।

आईएएफ का एएलएच विमान मंगलवार को सांगली में बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने में लगा था। इसी दौरान पिलपुतु हेलीपैड से 3.40 बजे उड़ान भरने के बाद यह लापता हो गया। हेलीकॉप्टर सांगली व दम्बुक में भारी बारिश से जमीन धंसने से लोगों को बचाने के कार्य में लगा था।

प्रादेशिक

श्रमजीवी पत्रकार डॉ. के. विक्रम राव हैं हर एक मीडिया पर्सन के लिए मिसाल

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समाज की सच्ची तस्वीर दिखाना हर एक ईमानदार पत्रकार की ज़िम्मेदारी होती है, ऐसे ही एक श्रमजीवी पत्रकार हैं डॉ. के. विक्रम राव।गद्यकार, सम्पादक, मीडिया शिक्षक और टीवी, रेडियो समीक्षक डॉ. के. विक्रम राव श्रमजीवी पत्रकारों के मासिक दि वर्किंग जर्नलिस्ट के प्रधान सम्पादक हैं।

वे वॉयस ऑफ अमेरिका (हिन्दी समाचार प्रभाग, वाशिंगटन) के दक्षिण एशियाई ब्यूरो में 15 वर्षों तक संवाददाता रहे। वे 1962 से 1998 तक दैनिक टाइम्स ऑफ इण्डिया (मुंबई) में कार्यरत थे।

नौ प्रदेशों में इसके ब्यूरो प्रमुख रहे। सम्प्रति 85 तेलुगु, हिंदी, उर्दू तथा अंग्रेजी पत्रिकाओं में स्तंभकार हैं। वे मुम्बई, हैदराबाद, कोची, दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकत्ता आदि के पत्रकारिता संस्थानों में रिपोर्टिंग पर व्याख्याता भी हैं।

वे डॉ. धर्मवीर भारती के “धर्मयुग” और रघुवीर सहाय के “दिनमान” में लिखते रहे। वे दैनिक इकनामिक टाइम्स, और पाक्षिक फिल्मफेयर में भी काम कर चुके हैं। विक्रम राव की समाचार रिपोर्ट की चर्चा विभिन्न विधान मण्डलों तथा संसद के दोनों सदनों में होती रही हैं।

मुरादाबाद, अहमदाबाद और हैदराबाद के साम्प्रदायिक दंगों पर उनकी रिपोर्ट अपनी वास्तविकता और सत्यता के लिए प्रशंसित हुई।बुन्देलखण्ड और उत्तर गुजरात में अकाल स्थिति पर भेजी उनकी रिपोर्टों से सरकारी और स्वयंसेवी संगठनों ने तात्कालिक मदद भेजी जिससे कई प्राण बचाए जा सके।

विक्रम राव की मातृभाषा तेलुगु है। वे मराठी, गुजराती तथा उर्दू भी जानते हैं। उन्होंने मीडिया पर नौ और डॉ. लोहिया पर दो पुस्तकें लिखी हैं। वे भारतीय प्रेस काउंसिल (PCI) के छह वर्षों (1991) तक लगातार सदस्य रहे।

श्रमजीवी पत्रकारों के लिए भारत सरकार द्वारा 2008 में गठित जस्टिस जी.आर. मजीठिया और मणिसाणा वेतन बोर्ड (1996) के वे सदस्य थे। प्रेस सूचना ब्यूरो की केन्द्रीय प्रेस मान्यता समिति के पाँच वर्षों तक वो सदस्य रहे।

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