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आईएस आतंकी का सिर उड़ाकर स्नाइपर ने बना दिया विश्व रिकार्ड

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लंदन। इराक में कनाडा की स्पेशल फोर्स के एक स्नाइपर ने इस्लामिक स्टेट के एक चरमपंथी को 3.5 किलोमीटर दूर से मार गिराया। साढ़े तीन किलोमीटर (11,319 फीट) की दूरी से सटीक निशाना लगाकर इस स्नाइपर ने विश्व रिकॉर्ड भी बना डाला। इतिहास में अभी तक किसी ने भी ढाई किलोमीटर से ज्यादा दूरी का सटीक निशाना नहीं लगाया है।

दरअसल आईएसआईएस के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन में स्नाइपर ने एक बिल्डिंग से निशाना लगाया था। निशाना टीएसी-50 रायफल से लगाया गया था। आतंकी को मार गिराने वाला स्नाइपर एलीट जेटीएफ-2(ज्वाइंट टास्क फोर्स 2) का हिस्सा है। इस फोर्स का इस्तेमाल आतंकियों से मुकाबला करने और बंधक को छुड़ाने के लिए होता है।

इस लक्ष्य की पुष्टि वीडियो कैमरा व अन्य डाटा के जरिए की गई। द ग्?ोब एंड मेल वेबसाइट ने सैन्य सूत्रों के हवाले से लिखा है, “यह एक कमाल की उपलब्धि है। यह एक ऐसा वर्ल्?ड रिकॉर्ड है जिसकी शायद बराबरी न हो सके।

इससे पहले सबसे ज्यादा दूरी से लक्ष्य भेदने का विश्व रिकॉर्ड ब्रिटिश स्नाइपर क्रैग हैरिसन के नाम था, जिन्होंने एक तालिबानी आतंकी को 2009 में 2,475 मीटर (8120 फीट) की दूरी से मार गिराया था। क्रेन ने 338 लापुआ मैग्नम राइफल का इस्तेमाल किया था।

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मुस्लिम देश का वो प्राचीन मंदिर जहां पीएम मोदी ने किए दर्शन

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को इस्लामिक देश बहरीन पहुंचे। इसी के साथ पीएम मोदी इस इस्लामिक देश की यात्रा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं।

अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने रविवार को इस देश के 200 साल पुराने मंदिर में दर्शन किए। बहरीन की राजधानी मनामा में स्थित यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण का है।

200 साल पहले स्थापित किए गए इस मंदिर का नाम  श्रीनाथजी (श्री कृष्ण) मंदिर  है। हाल ही में मंदिर का नवीनीकरण किया गया है। जिसमें 42 लाख डॉलर (करीब 30 करोड़ रुपये) की लागत आई है।

थाटई हिंदू व्यापारी समुदाय के अध्यक्ष बॉब ठाकेर के अनुसार,  45,000 वर्ग फुट क्षेत्र में तीन मंजिला भवन के साथ मंदिर का नवीनीकरण किया जा रहा है। इस मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए 80 फीसदी अधिक क्षमता होगी। हालांकि पहले मंदिर की क्षमता कम थी।

उन्होंने बताया कि “मंदिर एक नॉलेज सेंटर के अलावा मंदिर से जुड़ा एक संग्रहालय भी है। थाटई हिंदू व्यापारी समुदाय के एक प्रमुख सदस्य भगवान असारपोटा ने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री मंदिर के 200वें स्थापना वर्ष के उत्सव पर यहां का दौरा कर रहे हैं।”

बताया जाता है इस मंदिर की स्थापना 18वीं शताब्दी के दूसरे दशक में थाटई हिंदू व्यापारी समुदाय के लोगों की ओर से की गई थी। इसी समुदाय के लोग आज भी इस मंदिर की देखभाल करते हैं।

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