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इसरो की एक और ऊंची उड़ान, सरहद पर रखी जाएगी पैनी नजर

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श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को कार्टोसैट-2 श्रृंखला के उपग्रह तथा 30 अन्य छोटे उपग्रहों को ले जा रहे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) सी-38 का सफल प्रक्षेपण किया। 30 छोटे उपग्रहों में 29 विदेशी व एक भारतीय है। ये सैटेलाइट न सिर्फ भारत के सरहदी और प?ोस के इलाकों पर अपनी पैनी नजर रखेगा बल्कि स्मार्ट सिटी नेटवर्क की योजनाओं में भी मददगार रहेगा।

44.4 मीटर लंबे और 320 टन वजनी पीएसएलवी रॉकेट ने सुबह 9.29 बजे इन उपग्रहों के साथ उड़ान भरी। सभी 31 उपग्रहों का कुल वजन 955 किलोग्राम है।

पीएसएलवी के साथ भेजे गए उपग्रहों में से मुख्य उपग्रह कार्टोसैट-2 श्रृंखला का पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जिसका वजन 712 किलोग्राम है। यह कार्टोसैट श्रृंखला-2 के पूर्व के अन्य उपग्रहों के समान ही है।

भारत की ‘आसमान में आंख’ और तेज एवं व्यापक होने वाली है क्योंकि कार्टोसैट-2 सीरीज का तीसरा स्पेसक्राफ्ट रक्षा बलों के लिए है। इस सीरीज के पिछले उपग्रह का रिसॉल्यूशन 0.8 मीटर था और उसने भारत के पड़ोस की जो तस्वीरें ली उसने भारत को पिछले साल एलओसी के पार सात आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने में मदद दी। इस बार रिसॉल्यूशन 0.6 मीटर है। इसका मतलब है कि वह छोटी चीजों का भी पता लगा सकता है।

कार्टोसैट-2 श्रृंखला के उपग्रह में उन्नत श्रेणी के कैमरे लगे हैं, जो शहरी व ग्रामीण नियोजन, तटीय भूमि के उपयोग, सडक़ नेटवर्क की निगरानी आदि के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराएंगे। पूरे लॉन्च मिशन में करीब 23 मिनट का समय लगा।

पीएसएलवी के साथ जो 30 छोटे उपग्रह भेजे गए हैं, उनमें से 29 विदेशी हैं। ये उपग्रहण 14 विभिन्न देशों- ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, ब्रिटेन, चिली, चेक गणराज्य, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, लातविया, लिथुआनिया, स्लोवाकिया और अमेरिका के हैं।

पीएसएलवी के साथ भेजे गए 30 छोटे उपग्रहों में भारत का एक उपग्रहण एनआईयूएसएटी भी है। 15 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह तमिलनाडु की नूरल इस्लाम यूनिवर्सिटी का है। यह उपग्रह कृषि फसल की निगरानी और आपदा प्रबंधन सहायता अनुप्रयोगों के लिए मल्टी-स्पेक्ट्रल तस्वीरें प्रदान करेगा।

नेशनल

फांसी देने से पहले कैदी के कान में ये बोलता है जल्लाद..

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नई दिल्ली। निर्भया के गुनहगारों को भी अब अपनी मौत का डर सताने लगा है। खबर है कि निर्भया के चारों गुनहगारों को इसी महीने फांसी दी जा सकती है। अब तिहाड़ जेल प्रशासन को राष्ट्रपति के पास भेजी गयी दोषी विनय शर्मा की दया याचिका के खारिज होने का इंतजार है। जेल अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजे जाने के बाद से ही जेल में दोषी की फांसी की तैयारी शुरू कर दी जाती है।

आपको बता दें कि किसी को फांसी देते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है। जिसके बिना फांसी की प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है। फांसी की सजा फाइनल होने के बाद डेथ वारंट का इंतजार होता है। दया याचिका खारिज होने के बाद ये वारंट कभी भी आ सकता है। वॉरंट में फांसी की तारीख और समय लिखा होता है। डेथ वॉरंट जारी होने के बाद कैदी को बताया जाता है कि उसे फांसी होने वाली है। उसके बाद कैदी के परिवार को फांसी से 10-15 दिन पहले सूचना दे दी जाती है ताकि आखिरी बार परिवार के लोग कैदी से मिल सकें। जेल में कैदी की पूरी चेकिंग होती है। उसे बाकी कैदियों से अलग सेल में रखा जाता है।

आगे की बात करने से पहले आपको बता दें कि फांसी के वक्‍त मुजरिम के साथ जल्‍लाद के अलावा तीन अधिकारी होते हैं जिनमें जेल सुप्रीटेंडेंट, मेडिकल ऑफिसर और मजिस्ट्रेट शामिल हैं। लेकिन फांसी के फंदे तक ले जाने का काम जल्‍लाद का है और मौत से ठीक पहले आखिरी वक्‍त में वो ही मुजरिम के पास होता है। बता दें कि इस पूरे नियम-कानून के बीच सबसे बड़ा और सबसे मुश्किल काम जल्लाद का ही होता है। फांसी देने से पहले जल्लाद अपराधी के कानों में कुछ बोलता है जिसके बाद वह चबूतरे से जुड़ा लीवर खींच देता हैं। अगर अपराधी हिंदू है तो जल्‍लाद उसके कान में राम-राम कहता है और अगर मुस्‍लिम है तो सलाम। उसके बाद वो कहता है मैं अपने फर्ज के आगे मजबूर हूं, मैं आपके सत्य की राह पर चलने की कामना करता हूं।

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