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बाइक से मंदसौर जा रहे राहुल पुलिस हिरासत में, एमपी में हिंसा का दौर जारी

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मंदसौर, राहुल गांधी, मध्य प्रदेश, मोदी

मध्य प्रदेश में 5 किसानों की मौत के बाद से ही हिंसा की चपेट में चल रहे मंदसौर जिले जा रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

राहुल गांधी बाइक पर सवार होकर पुलिस गोलीबारी में मारे गए किसानों के परिवार वालों से मिलने के लिए मंदसौर जा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें निमच में ही हिरासत में ले लिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि किसानों की इस बदहाली के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम शिवराज सिंह चौहान जिम्मेदार हैं।

मंदसौर, राहुल गांधी, मध्य प्रदेश, मोदी

वहीं, राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, मुझे मध्य प्रदेश जाने और मंदसौर में मारे गए किसानों के परिवार से मिलने से रोकने के लिए राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार पूरा जोर लगा रही है। उन्होंने कहा, ‘अपने अधिकारों की मांग करते हुए मारे गए किसानों के समर्थन में खड़ा होने को देश का कौन सा कानून अवैध बताता है?’

इस बीच राज्य के मालवा इलाके में तीसरे दिन भी हिंसा का दौर जारी है। जिले के कलेक्टर और एसपी का तबादला कर दिया है। वहीं किसानों पर गोली चलाए जाने के मामले में पिपलिया मंडी के इंस्पेक्टर अनिल सिंह ठाकुर को फील्ड ड्यूटी से हटा दिया गया है।

बता दें कि मंदसौर प्रशासन ने राहुल गांधी के विमान को वहां उतारने करने की इजाजत नहीं दी है। ऐसे में वह पहले उदयपुर एयरपोर्ट पहुंचे और फिर वहां से सड़क के रास्ते बाइक से मध्य प्रदेश जा रहे थे। उधर नीमच के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने कहा है कि उन्हें हिंसा प्रभावित जिले में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। एसपी ने कहा कि अगर कांग्रेस नेता ने जिले में घुसने का प्रयास किया तो उन्हें हिरासत में ले लिया जाएगा।

उधर, राज्य में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने मंदसौर, देवास, नीमच, धार और इंदौर सहित कई हिस्सों में लूटपाट, आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव किया। गुरुवार को भी वहां हिंसा जारी है, जहां प्रदर्शनकारियों ने मंदसौर में एक टोल प्लाज़ा में तोड़फोड़ की और वहां रखे 8-10 रुपये लूट लिए। इस बीच हालात काबू में ना होता देख मंदसौर के एसपी और कलक्टर का ट्रांसफर कर दिया गया है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मंदसौर के कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह का तबादला करके उन्हें उपसचिव मंत्रालय नियुक्त किया गया है। सिंह के स्थान पर ओपी श्रीवास्तव को कलेक्टर नियुक्त किया गया है।

सूत्रों ने साथ ही बताया कि सरकार ने मंदसौर के पुलिस अधीक्षक ओपी त्रिपाठी का भी तबादला कर दिया है और उनके स्थान पर मनोज कुमार सिंह की नियुक्ति की गई है। वहीं पूर्व एसपी ओपी त्रिपाठी ने बताया कि विभिन्न जगहों में उपद्रव में शामिल 62 किसानों को गिरफ्तार किया गया है और हालात नियंत्रण में हैं।

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CBI जाँच क्यों नहीं, UP में हजारों करोड़ का सरकारी धन डकार गए फर्जी शिक्षक

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देश में शिक्षकों की नियुक्ति में सबसे बड़े घोटाले का खुलासा यूपी में हुआ है। बीते वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग में हजारों शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों से सरकारी नौकरी न सिर्फ हथियाई बल्कि हजारों करोड़ का वेतन भी हजम कर डाला है। यूपी में एसआईटी और एसटीएफ की शुरूआती जांच में जो खुलासे हो रहे हैं उससे हर कोई दंग है। कार्रवाई के नाम पर बड़े अफसर सिर्फ एफआईआर और वेतन वसूली दिखाकर अपनी गर्दन बचाने की जुगत में हैं। हकीकत यही है प्रदेश में शिक्षा विभाग को माफिया के हाथों पिछली सरकारों में मानो गिरवी ही रख दिया गया। सवाल ये भी है आखिर जिन अफसरों-नेताओं-मंत्रियों के सिंडिकेट ने यूपी के शिक्षा महकमे ने अरबों की रिश्वत लेकर बीते एक दशक के दौरान हजारों फर्जी नियुक्तियां की हैं वो कब जेल की सलाखों के पीछे जायेंगे। सबसे बड़ा सच ये भी है कि इन भ्रष्टों के रिश्तेदारों को भी सरकारी शिक्षकों की नौकरियां रेवड़ियों की तरह बांटी गयी हैं।
यूपी में आगरा के भीमराव अम्बेडकर विश्विद्यालय से जारी 2823 शिक्षकों की डिग्री फर्जी पाई गयी है

up fake degree scam

जिन्होंने बेसिक शिक्षा महकमे के अधीन परिषदीय स्कूलों में नियुक्ति पाई थी। भर्तियां वर्ष 2004-2005 से लेकर वर्ष 2016 तक पूरे प्रदेश में की गयी है। फिलहाल 930 शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है 497 शिक्षकों पर विभाग ने कार्रवाई का डंडा चलाया है वहीं 1427 शिक्षकों से वेतन वसूली की तयारी है लेकिन बेसिक शिक्षा महकमे के आंकड़ों में बड़ा झोल भी है। दरअसल आगरा के भीमराव आबेडकर विश्विद्यालय से डिग्री लिए एक हजार से ज्यादा शिक्षक अपने दस्तावेजों को असली बता रहे हैं डिग्रियां वाकई असली हैं या नकली। इसकी रिपोर्ट सरकार जारी करने से क्यों हिचक रही है
एसआईटी जांच में हुए इस हैरतअंगेज खुलासे के बाद अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने फर्जी शिक्षकों से वसूली करने व एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जिलों को जारी किये हैं हर शिक्षक से औसतन 60 लाख की वेतन वसूली होना तय है। करीब नौ सौ करोड़ की बड़ी सरकारी रकम इन फर्जी शिक्षकों से वसूली जायेगी।

जल्द ही प्रदेश के अफसर अपनी रिपोर्ट शासन को सौपेंगे। एसआईटी के पास शिक्षा महकमे के घोटालों की कई और जांचें भी हैं दरअसल डिजिटल तकनीक से यूपी के शिक्षा महकमे में रोजाना नए घोटालों का खुलासा हो रहा है परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों का डाटा मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप पर अपलोड कराने के बाद फर्जीवाड़ों के नए किस्से सामने आये। पूरा खेल 2008 से 2019 के बीच अंजाम दिया गया है मानव संपदा पोर्टल पर 15 जुलाई तक डाटा सत्यापित होने के बाद करीब 5 हजार से ज्यादा शिक्षकों के दस्तावेजों में गड़बड़ियां आना तय माना जा रहा है एसआईटी के अलावा एसटीएफ ने भी सीएम योगी के आदेश पर यूपी में हजारों शिक्षकों के दस्तावेजों में धांधलियों की जांच शुरू की है। हजारों शिक्षकों ने नियुक्ति के समय जो पैन नंबर दिया था वह उसी नाम के किसी अन्य शिक्षक के नाम पर दर्ज था।

दरअसल शिक्षकों के द्वारा पैन नम्बर बदले जाने की जानकारी जैसे ही शासन को मिली। सभी अफसरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। सैकड़ों ऐसे मामले भी सामने आएं, जिनमें कई शिक्षकों का वेतन एक ही बैंक खाते में जा रहा था। बस फिर क्या था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घोटाले की जानकारी होते ही बेसिक शिक्षा विभाग के फर्जीवाड़े की जांच एसटीएफ को सौप दी गयी।
यूपी के शिक्षा महकमे के खेल बड़े निराले हैं हाल ही में अनामिका शुक्ला प्रकरण सामने आया था। जिसमे खुलासा हुआ कि अनामिका खुद तो बेरोजगार थी लेकिन उसके शैक्षिक दस्तावेजों पर 25 जिलों के कस्तूरबा स्कूलों में फर्जी शिक्षिकाएं नौकरी कर रही थी। एसटीएफ की जांच आगे बढ़ी तो शिक्षा माफिया के खेल का पर्दाफाश हो गया। खुद बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश दिवेदी ने भी इस गंभीर मामले पर सफाई पेश की थी।
योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा महकमे में फर्जीवाड़ों को देखने के बाद माध्यमिक और उच्च शिक्षा में भी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया शुरू की है इस सिलसिले में डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने हाल ही में सरकार की और से अपना पक्ष रखते हुए शिक्षा माफिया पर सख्ती की बात भी कही है लेकिन इस तरह के फर्जीवाड़ों से एक बात जरूर निकल कर सामने आ रही है आखिर क्यों उत्तरप्रदेश में शिक्षा विभाग को भिक्षा विभाग कहा जाता है

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