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जाधव को फांसी से बचाने की वकील हरीश साल्‍वे की फीस महज 1 रुपये

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कुलभूषण जाधव, हरीश साल्वेश, फांसी, ICJ,

नई दिल्ली।  इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) यानी इंटरनेशनल कोर्ट  में कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में दी गई मौत की सजा के खिलाफ भारत की ओर से पैरवी कर रहे हैं जाने-माने वकील हरीश साल्वे। आपको जानकर हैरानी होगी कि बेहद महंगे वकीलों में शुमार हरीश साल्‍वे महज 1 रुपए की टोकन फीस पर यह केस लड़ रहे हैं। ये जानकारी ट्विटर पर खुद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दी है।

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कुलभूषण मामले पर बहस की शुरुआत फिल्मकार और समाजसेवी अशोक पंडित के ट्वीट से हुई। उन्होंने लिखा, ‘भगवान का शुक्र है कि अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत में कांग्रेस के कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद नहीं बल्कि हरीश साल्वे पैरवी कर रहे थे।

इनटोलरेंट भारतीय नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा था, “भारत का कोई भी अच्छा वकील यही कर सकता था- फैसले का इंतज़ार, और वो हरीश साल्वे से कम ही फ़ीस लेता”

भारत के पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव इस समय पाकिस्तान की जेल में बंद हैं और वहाँ की सैन्य अदालत ने उन्हें फाँसी की सज़ा सुनाई है। भारत इस मामले को लेकर हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस गया था, जहाँ इस पर सोमवार को सुनवाई हुई। हरीश साल्वे ने इस अदालत में भारत का पक्ष रखा है।

 

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इस गांव के नीचे मिला 680 टन सोना, नाम जानते ही फावड़ा लेकर निकल पड़ेंगे आप

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नई दिल्ली। अगर आपको पता चले कि जिस गांव के आप रहने वाले हैं उसके नीचे कई टन सोना छुपा होगा तो क्या करेंगे? फावड़ा उठाएंगे और खुदाई शुरू कर देंगे….है न?

लेकिन कोलंबिया के एक छोटे से गांव के लोगों ने ऐसा नहीं किया कोलंबिया के काजामारका गांव में रहने वाले लोगों को जब ये पता चला कि उनके गांव के नीचे 680 टन सोना है तो उन्होंने इसे निकालने से मना कर दिया। आपको बता दें कि इस खजाने की कीमत लगभग 2.43 लाख करोड़ रुपए है।

गांववालों ने खदान की खुदाई शुरू करने के लिए हुए जनमत संग्रह में एकजुट होकर इसका विरोध किया। उनका कहना है कि यदि पर्यावरण बचेगा तो हम बचेंगे। हम चाहते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ी को बेहतर सेहत और पर्यावरण मिले। 19 हजार की आबादी वाले गांव में से केवल 79 लोगों ने खुदाई के पक्ष में मतदान किया।

कोलंबिया सरकार के अनुसार काजामारका गांव में दबा हुआ सोने का यह भंडार दक्षिण अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा भंडार है। सरकार ने खनन की जिम्मेदारी दक्षिण अफ्रीकी कंपनी एंग्लोगोल्ड अशांति को सौंपी थी। इस खदान को ला कोलोसा का नाम दिया गया है।

सरकार का मानना था कि यहां मार्क्सवादी विद्रोही खत्म हो गए हैं। इसलिए यहां आसानी से खनन किया जा सकता है। मगर जनमत संग्रह के नतीजों ने सरकार की उम्मीदें तोड़ दी हैं। कोलंबिया के खनन मंत्री जर्मन एर्स जनमत संग्रह के परिणाम से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि लोगों को इस मामले में गुमराह किया गया है।

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