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लालू यादव के 22 ठिकानों पर आयकर छापेमारी, बेनामी संपत्ति मामले में कसा शिकंजा

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लालू, आयकर छापेमारी, बेनामी संपत्ति, शिकंजा

राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। आयकर विभाग ने लालू यादव के खिलाफ बेनामी संपत्ति के मामले में दिल्ली-एनसीआर के 22 ठिकानों पर छापेमारी की है।

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विभाग ने आज सुबह करीब आठ बजे से ही यह छापेमारी शुरू कर दी। ये छापे एक हजार करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति की खरीद-फरोख्त से जुड़े बताए जा रहे हैं। यहीं नहीं लालू यादव के बेटों और दामाद सहित सांसद प्रेमचंद गुप्ता के बेटों के घर पर भी छापेमारी जारी है।

दिल्ली के घिटोरनी स्थित शकुंतला फार्म पर भी आयकर विभाग की छापेमारी चल रही है। बता दें कि शकुंतला फार्म प्रेमचंद गुप्ता के नाम पर है और शकुंतला फार्म में लालू का परिवार रहता है। इसके अलावा बिजवासन, सैनिक फार्म की प्रॉपर्टी और गुरुग्राम में भी है प्रॉपर्टी।

गौरतलब है कि भाजपा नेता सुशील मोदी लगातार लालू की अवैध संपत्ति को लेकर खुलासे करते रहे हैं और इस मामले में उन्होंने करीब 40 दस्तावेज पेश किए थे। कल नीतीश कुमार ने भी कहा था कि अगर इस मामले में विपक्ष के पास कोई प्रूफ है तो वो जांच करा लें। इस बयानबाजी और तमाम हलचल के बाद आज सुबह 8.30 से ही आयकर विभाग ने छापेमारी करनी शुरू कर दी है।

उधर, भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पिछले सप्ताह इस कथित खरीद-फरोख्त की जांच कराने की मांग की थी। उनका आरोप है कि यादव की बेटी मीसा भारती ने राज्यसभा चुनाव में दिए हलफनामे में इस कथित लेन-देन का खुलासा नहीं किया था। यह खरीद-फरोख्त उस दौरान की गई जब लालू यादव पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार में रेल मंत्री थे।

प्रादेशिक

गुजरात के साबरमती जेल में 8 कैदी पाए गए कोरोना पॉजिटिव

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नई दिल्ली। गुजरात के साबरमती सेंट्रल जेल में कोविड परीक्षण के दौरान कम से कम आठ कैदियों को इस बीमारी से संक्रमित पाया गया है।गुजरात हाईकोर्ट में 2019 के एक हत्या मामले में आरोपी मनुभाई देसाई की जमानत याचिका को मंजूरी दिए जाने के बाद साबरमती सेंट्रल जेल के अधिकारियों ने उसे घर भेजने से पहले उसका परीक्षण करने का फैसला किया।

परीक्षण में आठ कैदियों के कोरोना पॉजिटिव होने का पता चला। यह पहला उदाहरण है जब कैदियों ने बाहरी दुनिया से संपर्क नहीं किया है और जेल के अंदर उन्हें पॉजिटिव पाया गया है। सभी कोविड पॉजिटिव कैदियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

देसाई ने अपनी बीमार पत्नी का हवाला देते हुए उच्च न्यायालय में जमानत की अर्जी दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि उसे अपने बच्चों के साथ रहने की जरूरत है, क्योंकि उसका घर अहमदाबाद के कंटेनमेंट जोन में है।

उसे संदेह था कि उसकी पत्नी वायरस के संपर्क में आई होगी, इसलिए अदालत ने उसकी पत्नी को आरटी-पीसीआर परीक्षण का आदेश दिया, लेकिन वह्र नेगेटिव निकली।

अदालत को यह आशंका थी कि यदि पत्नी पॉजिटिव होती, तो वह न केवल बच्चों को संक्रमित कर सकती थी, बल्कि देसाई भी जेल वापस आते समय अपने साथ वायरस ला सकता था। हालांकि बाद में उसकी पत्नी के एक पॉजिटिव रोगी के संपर्क में आने के बाद उसे क्वारंटीन कर दिया गया।

इस बात की जानकारी मिलने के बाद एक बार फिर मनुभाई ने अपने बच्चों के साथ रहने के लिए गुजरात हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी दायर की। अदालत ने इसे मंजूर कर लिया और उसे बिना परीक्षण कराए आगे नहीं बढ़ने के लिए भी कहा। गुजरात उच्च न्यायालय ने गुरुवार को इस कैदी का कोरोना परीक्षण कराने का आदेश दिया।

साबरमती सेंट्रल जेल के पुलिस उपाधीक्षक डीवी राणा ने बताया, “हमने पाया कि मनुभाई के अलावा, उनके बैरक से चार अन्य कैदी भी पॉजिटिव थे और अन्य बैरकों से तीन और कैदियों को पॉजिटिव पाया गया। यह पहली बार है, जब जेल के अंदर ही कैदी ऐसे पॉजिटिव पाए गए हैं।”

 

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