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अखिलेश यादव का नया पैंतरा, ‘बुआ’ संग मिलकर नहीं खिलने देंगे कमल

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लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में नए तरह के गठबंधन के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि वह त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ‘रिमोट कंट्रोल’ से सरकार नहीं चलाने देंगे। अखिलेश ने कहा कि कोई भी यूपी में राष्‍ट्रपति शासन नहीं चाहता ताकि बीजेपी रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाए।

अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सपा-कांग्रेस का गठबंधन उत्तर प्रदेश में जीत हासिल करेगा। गठबंधन के सवाल पर अखिलेश ने पहली बार माना कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को साथ लाने में राहुल और प्रियंका दोनों की भूमिका रही।

यह पूछे जाने पर कि स्पष्ट जनादेश नहीं आने पर क्या वह बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से हाथ मिलाएंगे, अखिलेश ने कहा कि वह भाजपा को रिमोट कंट्रोल के जरिए उत्तर प्रदेश को नहीं चलाने देंगे।

बसपा प्रमुख मायावती के साथ जाने पर उन्होंने कहा, “मैं बसपा नेता को आदरसूचक शब्द (बुआ) से संबोधित करता हूं। इससे अधिक अभी मैं कुछ और नहीं कह सकता।”

गुरुवार को सामने आए अधिकांश एग्जिट पोल में उत्तर प्रदेश में किसी को भी बहुमत नहीं मिलने का अनुमान जताते हुए कहा गया है कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है।

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निर्मला सीतारमण से मिलने पहुंचे मनीष सिसोदिया, मांगी केंद्रीय करो में हिस्सेदारी

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नई दिल्ली। केजरीवाल सरकार में वित्तमंत्री व दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान सिसोदिया ने दिल्ली नगर निगम के लिए फंड की आवश्यकता और केंद्रीय करो में हिस्सेदारी जैसे मुद्दे वित्तमंत्री के सामने रखे । दिल्ली में एक बार फिर आम आदमी पार्टी(आप) की सरकार बनने के बाद दिल्ली सरकार व केंद्रीय वित्त मंत्रालय के बीच यह पहली बैठक है।

इस महत्वपूर्ण बैठक की जानकारी देते हुए दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, “दिल्ली के वित्तमंत्री का पद पुन: संभालने के बाद आज केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात की, उनके साथ दिल्ली के आर्थिक विकास के लिए सहयोग पर सकारात्मक चर्चा हुई है।”

सिसोदिया ने कहा, “केंद्रीय वित्तमंत्री के साथ बैठक में मैंने दिल्ली नगर निगम के लिए भी उसी तरह फंड दिए जाने की भी मांग की, जिस प्रकार केंद्र सरकार अन्य राज्यों के निगमों को (488 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष के हिसाब से) देती है। अभी दिल्ली नगर निगम के लिए केंद्र सरकार से कोई फंड नहीं मिलता है।”

गौरतलब है कि दिल्ली के तीनों नगर निगमों पर भाजपा का शासन है। नगर निगम पिछले कई वर्षों से फंड की कमी का राग अलाप रहा है। फंड की कमी के चलते कई मर्तबा हजारों नगर निगम कर्मियों की तनख्वाह कई-कई महीनों तक जारी नहीं हो सकी।

नगर निगम फंड की कमी के लिए जहां दिल्ली सरकार को दोषी बताता है। वहीं दिल्ली सरकार का कहना है कि नगर निगम को पिछले वर्षों के मुकाबले अधिक फंड दिया गया है वह भी तब जबकि उसे केंद्र की ओर से निगम के लिए कोई अतिरिक्त राशि नहीं दी जा रही है।

बैठक की जानकारी देते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा, “केंद्रीय वित्तमंत्री से मैंने केंद्रीय करों में दिल्ली के लिए भी हिस्सा दिए जाने की मांग की, ताकि दिल्ली में स्कूल-अस्पताल खोलने, यमुना को साफ करने, बिजली पानी की व्यवस्था करने आदि के लिए काम और तेजी से किए जा सकें।”

दरअसल, दिल्ली सरकार का कहना है, “केंद्र की ओर से बीते 9 वर्षों से केंद्रीय करो में मिलने वाला हिस्सा दिल्ली को नहीं दिया जा रहा है।”

दिल्ली सरकार के मुताबिक, दिल्ली से एकत्र होने वाले केंद्रीय करों में दिल्ली की भी हिस्सेदारी बनती है। यह हिस्सेदारी मिलने पर दिल्ली में विकास कार्य और अधिक तेजी से किए जा सकेंगे।

मनीष सिसोदिया ने कहा, “केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2001 से केंद्रीय करों में दिल्ली को कोई हिस्सा नही दिया जाता है। केंद्रीय करों का 42 प्रतिशत हिस्सा वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर अन्य सभी राज्यों को दिया जाता है। 2001 से पहले दिल्ली को भी इसमें हिस्सा मिलता रहा है।”

मनीष सिसोदिया की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से हुई इस मुलाकात से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं। चुनाव में मिली जीत के बाद अरविंद केजरीवाल का कहना था कि दिल्ली सरकार केंद्र के साथ मिलकर दिल्ली का विकास करेगी।

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