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अखिलेश यादव का नया पैंतरा, ‘बुआ’ संग मिलकर नहीं खिलने देंगे कमल

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लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में नए तरह के गठबंधन के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि वह त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ‘रिमोट कंट्रोल’ से सरकार नहीं चलाने देंगे। अखिलेश ने कहा कि कोई भी यूपी में राष्‍ट्रपति शासन नहीं चाहता ताकि बीजेपी रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाए।

अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सपा-कांग्रेस का गठबंधन उत्तर प्रदेश में जीत हासिल करेगा। गठबंधन के सवाल पर अखिलेश ने पहली बार माना कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को साथ लाने में राहुल और प्रियंका दोनों की भूमिका रही।

यह पूछे जाने पर कि स्पष्ट जनादेश नहीं आने पर क्या वह बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से हाथ मिलाएंगे, अखिलेश ने कहा कि वह भाजपा को रिमोट कंट्रोल के जरिए उत्तर प्रदेश को नहीं चलाने देंगे।

बसपा प्रमुख मायावती के साथ जाने पर उन्होंने कहा, “मैं बसपा नेता को आदरसूचक शब्द (बुआ) से संबोधित करता हूं। इससे अधिक अभी मैं कुछ और नहीं कह सकता।”

गुरुवार को सामने आए अधिकांश एग्जिट पोल में उत्तर प्रदेश में किसी को भी बहुमत नहीं मिलने का अनुमान जताते हुए कहा गया है कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है।

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बसपा के 6 विधायकों ने दिया मायावती को झटका, कांग्रेस में हुए शामिल

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नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती को बड़ा झटका लगा है। यह झटका राजस्थान में उनके 6 विधायकों ने दिया है। सोमवार को राजस्थान में बसपा के टिकट से चुनाव जीतने वाले विधायकों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया।

विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब राजस्थान में सरकार और भी ज्यादा मजबूत स्थिति में आ गई है। इससे पहले बसपा के ये 6 विधायक कांग्रेस को बाहर से समर्थन दे रहे थे।

बसपा विधायकों ने सोमवार देर रात कांग्रेस की सदस्यता ली। रात 10:30 बजे सभी विधायक विधानसभा पहुंचे और कांग्रेस में शामिल हुए।

इन विधायकों में राजेन्द्र गुढा (विधायक, उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (विधायक, नदबई), वाजिब अली (विधायक, नगर), लाखन सिंह मीणा (विधायक, करोली), संदीप यादव (विधायक, तिजारा) और बसपा विधायक दीपचंद खेरिया शामिल हैं।

विधायक जोगेंद्र सिंह अवाना ने कहा कि सभी छह विधायकों ने जरुरी कागजात सब्मिट कर दिए हैं। ढेर सारी चुनौतियां थीं। एक तरफ हम राज्य में कांग्रेस सरकार का समर्थन कर रहे हैं और दूसरी तरफ हम उनके खिलाफ संसद चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में हमने हमारे निर्वाचन क्षेत्रों के विकास और राज्य के लोगों के कल्याण को देखते हुए यह कदम उठाया है।

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