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रिसोर्ससैट-2ए उपग्रह के साथ पीएसएलवी रॉकेट का सफल प्रक्षेपण

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पीएसएलवी रॉकेट की उल्टी गिनती जारी : इसरो

 

श्रहरिकोटा | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को अंतरिक्ष के क्षेत्र में बुधवार को एक और कामयाबी मिली। इसने अपने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के जरिये पृथ्वी अवलोकन उपग्रह रिसोर्ससैट-2ए का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया। इसरो के मुताबिक, 44.4 मीटर लंबा और 321 टन वजनी पीएसएलवी-एक्सएल रॉकेट का प्रक्षेपण सुबह 10.25 बजे किया गया।

यह रॉकेट 1,235 किलोग्राम वजनी भारत के पृथ्वी अवलोकन उपग्रह रिसोर्ससैट-2ए को अपने साथ ले गया है।

पीएसएलवी रॉकेट चौथी पीढ़ी/इंजन रॉकेट है, जो ठोस व तरल, दोनों प्रकार के वैकल्पिक ईंधन से संचालित होता है।

इसरो के अनुसार, रिसोर्ससैट-2ए, रिसोर्ससैट -1 और रिसोर्ससैट-2 मिशन का ही अगला क्रम है। इन्हें 2003 और 2011 में लांच किया जा चुका है।

रिसोर्ससैट-2ए में तीन पेलोड हैं। पहले के दो रिसोर्ससैट के साथ भी ऐसा था।

उपग्रह में 200 गीगा बिट क्षमता वाले सॉलिड स्टेट रिकॉडर्स भी है, जो अपने कैमरों से चित्रों को एकत्र कर सकते हैं और उन्हें बाद में पृथ्वी के स्टेशनों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

रिसोर्ससैट-2ए के मिशल का जीवनचक्र पांच साल है।

अन्तर्राष्ट्रीय

कोरोना वायरस भेष बदलकर फिर पहुंचा चीन, इस बदलाव के साथ बना पहले से भी खतरनाक

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस दुनिया के सभी देशों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। इस वायरस से अब मरने वालों की संख्या 76 हजार के पार हो गई है। दुनिया के किसी देश के वैज्ञानिकों को इसकी दवा खोजने में अबतक कामयाबी हासिल नहीं हुई है।

इस बीच यह वायरस जहां से निकला है वहीं दोबारा भेष बदलकर पहुंच चुका है। इस बार यह कोरोना वायरस और भी ज्यादा खतरनाक होकर चीन में लौटा है। यह इतना खतरनाक है कि लोगों को आसानी से चकमा दे सकता है।

ये नया कोरोना भी चीन के उसी हुबेई प्रांत से आया है जहां से पुराना कोरोना निकला था। जानकारों की मानें तो ये नया कोरोना पुराने कोरोना से भी कहीं ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इस नए कोरोना का कोई लक्षण ही नहीं है। यानी इसके शिकार शख्स को पता ही नहीं चलेगा कि वो संक्रमित है या नहीं?

अभी तक सर्दी, खांसी, गला खराब, बुखार सांस लेने में तकलीफ को ही कोरोना के लक्षण बताए गए हैं और अभी इस कोरोना से पूरी दुनिया जूझ ही रही है कि दुनिया को डराने के लिए नई शक्ल में कोरोना उसी चीन में दोबारा लौट आया है जहां से पहला कोरोना फैला था, मगर इस बार ज्यादा खतरनाक तरीके से।

इस नए कोरोना के संक्रमण का कोई लक्षण ही नहीं है इसीलिए इसे एसिम्टोमैटिक केस कहा जा रहा है। एसिम्टोमैटिक कोरोना का मरीज कोविड-19 के आम मरीज से ज़्यादा खतरनाक होता है क्योंकि कम से कम उनमें कोरोना के लक्षण नजर आते हैं।

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