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वियतनामी रक्षामंत्री ने मोदी से मुलाकात की

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वियतनामी रक्षामंत्री ने मोदी से मुलाकात कीनई दिल्ली | वियतनाम के रक्षामंत्री जनरल एन. जुआन लिच ने मंगलवार को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि मोदी ने मुलाकात के दौरान गत सितम्बर महीने में अपने वियतनाम दौरे को याद किया, जब द्विपक्षीय संबंध समग्र सामरिक साझेदारी में क्रमोन्नत हुए थे।

बयान के अनुसार, मोदी ने कहा, “वियतनाम भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ का एक प्रमुख स्तंभ है।”

बयान में कहा गया है, “जनरल लिच ने प्रधानमंत्री को द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई प्रगति से अवगत कराया। प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में भारत और वियतनाम के द्विपक्षीय संबंध एक दीर्घकालिक और परस्पर लाभकारी हैं और उन्होंने दोहराया कि भारत रक्षा संबंधों को आगे और मजबूती प्रदान करने को संकल्पित है।”

मोदी ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच सभी क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग पूरे क्षेत्र की स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि में योगदान करेगा।

मोदी के वियतनाम दौरे के दौरान भारत ने 50 करोड़ डॉलर के रक्षा ऋण की पेशकश की थी, जिसका कुछ अंश अपतटीय गश्ती नौकाओं के निर्माण के लिए इस्तेमाल होगा।

वियतनाम उन देशों में एक है, जिसका चीन के साथ दक्षिण चीन सागर को लेकर विवाद है।

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देश में कोरोना की वैक्सीन बना रहे हैं 30 ग्रुप, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने दी जानकारी

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नई दिल्ली। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने गुरुवार को कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 30 समूह कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं, जिनमें बड़े उद्योग घरानों से लेकर शिक्षाविद् तक हैं।

उन्होंने कहा कि यह बहुत रिस्की प्रॉसेस है। दुनिया में बहुत सारे लोग वैक्सीन की बात कर रहे हैं, लेकिन यह पता नहीं है कि किसकी वैक्सीन प्रभावी होगी। अगर वैक्सीन वेस्ट हो जाती है तो नुकसान भी होता है।

राघवन ने कहा कि इन 30 में से 20 समूह बहुत तेज रफ्तार से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘भारत में बड़े उद्योगों से लेकर शिक्षाविदों तक करीब 30 समूह कोविड-19 के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं जिनमें से 20 अच्छी रफ्तार से काम कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि वैक्सीन हम नॉर्मल लोगों को देते हैं न कि बीमार को और किसी भी अंतिम स्टेज के मरीज को इसलिए जरूरी है कि वैक्सीन की क्वालिटी और सेफ्टी को पूरी तरह से टेस्ट किया जाए। राघवन ने कहा कि सामान्य तौर पर टीका बनाने में करीब 10 साल लगते हैं, लेकिन दुनिया भर में कोरोना वायरस के लिए एक साल के अंदर टीका बनाने के लक्ष्य के साथ काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई दवा बनाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम होता है और इसी तरह टीका बनाने में बहुत लंबा वक्त लगता है।

उन्होंने कहा कि कई प्रयास विफल हो जाते हैं और इस तरह आपको बहुत कोशिशें करनी होती हैं। राधवन ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद और एआईसीटीई ने भी दवा बनाने के प्रयास शुरू किए हैं।

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