Connect with us
https://www.aajkikhabar.com/wp-content/uploads/2020/12/Digital-Strip-Ad-1.jpg

मुख्य समाचार

बिहार: कांग्रेस ने गठबंधन टूटने का दिए संकेत, सियासत गर्माई

Published

on

Loading

Nitish kumar newपटना। बिहार में सत्ताधारी महागठबंधन में शामिल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और राज्य के शिक्षामंत्री अशोक चौधरी के उस बयान को लेकर सियासत गर्मा गई है, जिसमें उन्होंने गठबंधन टूटने की बात कही थी। गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस बयान को बेमतलब का बताया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तंज कसते हुए कहा कि बिहार में मंत्री ही सरकार के मुखिया के विरोध में हैं। हालांकि, जनता दल (युनाइटेड) का कहना है कि गठबंधन मजबूत है।

कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी ने यहां बुधवार को कहा कि कांग्रेस जनता की मुश्किलों के साथ है। उन्होंने कहा कि यदि आलाकमान की ओर से निर्देश मिलेगा, तो आज भी गठबंधन टूट सकता है।

पटना में नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस द्वारा आयोजित विरोध मार्च में भाग लेते हुए चौधरी ने कहा, “कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और हमारी पार्टी जनता की मुश्किलों के साथ है। नोटबंदी से अगर जनता को परेशानी हो रही है, तो हम जनता के साथ खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “पार्टी के आलाकमान की सहमति से हमने बिहार मे महागठबंधन का साथ दिया था। अगर आलाकमान का निर्देश हो तो आज ही बिहार में गठबंधन टूट सकता है। हमें कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन साथ रहेगा और कौन जाएगा?”

इधर, सत्ताधारी महगठबंधन में शामिल जनता दल (युनाइटेड) के महासचिव क़े सी़ त्यागी से जब चौधरी के इस बयान के विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “अशोक चौधरी का बयान समझ से परे है। जहां तक नोटबंदी की बात है, तो महागठबंधन में शामिल तीनों दल एक साथ खड़े हैं। सदन में सभी विपक्ष साथ हैं।”

उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से गठबंधन की सेहत पर कोई असर नहीं पडऩे वाला है।

इस बीच राजद के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के किसी भी नेता का बयान बेमतलब है। उन्होंने कहा, “जबतक कांग्रेस आलाकमान का कोई बयान नहीं आता, ऐसे बयान का कोई मतलब नहीं है।”

इस बीच, राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने चौधरी के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मंत्री ही सरकार के मुखिया के विरोध में हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नंदकिशोर यादव ने कहा, “बिहार में राजद, जद (यू) और कांग्रेस का गठबंधन नापाक है। यह केवल सत्ता के लिए है। इस सरकार के मंत्री ही सरकार के मुखिया का विरोध कर रहे हैं। वे गठबंधन तोडऩे की धमकी दे रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जवाब देना चाहिए कि वह कैसी सरकार चला रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार की नोटबंदी का समर्थन किया है।

नेशनल

दूसरे चरण में धार्मिक ध्रुवीकरण के समीकरण का चक्रव्यूह भेद पाएंगे मोदी!

Published

on

Loading

सच्चिदा नन्द द्विवेदी एडिटर-इन-चीफ

लखनऊ। राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस केंद्र में सत्ता में आती है, तो वह लोगों की संपत्ति लेकर मुसलमानों को बांट देगी. इसके बाद ही विकास की रफ्तार पर चलने वाला चुनाव दूसरे चरण के पहले हिन्दू मुस्लिम के बीच बंट गया है। दरअसल मोदी का ये बयान यूं ही नहीं आया है, दूसरे चरण में जहां जहां मतदान होना है वहाँ की बहुतायत सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक स्थिति में है… इसमें राहुल गांधी की वायनाड सीट भी है जहां मुस्लिम वोटर करीब 50 फीसदी है।

26 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान होना है। पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल को हो चुका है जिसमें कम मतदान प्रतिशत ने सत्तारूढ़ बीजेपी के केन्द्रीय नेतृत्व को चिंता में डाल दिया है। दूसरे चरण में 88 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हैं। केरल की सभी 20 लोकसभा सीटों पर इसी चरण में मतदान हो जाएगा। कर्नाटक की 14 और राजस्थान की 13 लोकसभा सीटों पर भी मतदान होगा।

इसके पहले कि मोदी के बयान के गूढ़ार्थ को समझा जाए एक बार दूसरे चरण की सीटों का गणित समझना जरूरी हो जाता है। इसमें सबसे ज्यादा जरूरी है केरल राज्य जहां पर चल रहे लव जिहाद के किस्से और धार्मिक ध्रुवीकरण के समीकरण का चक्रव्यूह आज तक बीजेपी नहीं भेद पाई है। केरल में हिन्दू आबादी करीब 54 फीसदी है तो मुस्लिम आबादी करीब 26 फीसदी तो ईसाई वहां 18 फीसदी हैं। जबकि सिख बौद्ध और जैन महज 1 फीसदी हैं। यही वो धार्मिक समीकरण का तिलिस्म हैं जिसे बीजेपी इस बार तोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

इतना ही नहीं केरल में करीब 15 लोकसभा सीट ऐसी हैं मुस्लिम बहुतायत में हैं। वहीं वायनाड में तो मुस्लिम आबादी करीब 50 फीसदी है जहां से राहुल गांधी पिछले बार जीत कर सांसद चुने गए थे और इस बार भी वायनाड़ के रास्ते दिल्ली पहुंचना चाहते हैं। राज्यवार नजर डालें तो पिक्चर काफी हद तक साफ हो जाती है। आखिर शब्दों पर संयम रखने वाले मोदी ने चुनावी फिजा बदलने वाला ये बयान क्यों दिया? इसके लिए इन सीटों पर नजर डालिए।

इन सीटों पर दूसरे चरण में मतदान

असम: दर्रांग-उदालगुरी, डिफू, करीमगंज, सिलचर और नौगांव।
बिहार: किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर और बांका।
छत्तीसगढ़: राजनांदगांव, महासमुंद और कांकेर।
जम्मू-कश्मीर: जम्मू लोकसभा ।
कर्नाटक: उडुपी-चिकमगलूर, हासन, दक्षिण कन्नड़, चित्रदुर्ग, तुमकुर, मांड्या, मैसूर, चामराजनगर, बेंगलुरु ग्रामीण, बेंगलुरु उत्तर, बेंगलुरु केंद्रीय, बेंगलुरु दक्षिण,चिकबल्लापुर और कोलार।
केरल: कासरगोड, कन्नूर, वडकरा, वायनाड, कोझिकोड, मलप्पुरम, पोन्नानी, पलक्कड़, अलाथुर, त्रिशूर, चलाकुडी, एर्णाकुलम, इडुक्की, कोट्टायम, अलाप्पुझा, मवेलिक्कारा, पथानमथिट्टा, कोल्लम, अट्टिंगल और तिरुअनंतपुरम।
मध्य प्रदेश: टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, रीवा और होशंगाबाद।
महाराष्ट्र: बुलढाणा, अकोला, अमरावती, वर्धा, यवतमाल- वाशिम, हिंगोली, नांदेड़ और परभणी।
राजस्थान: टोंक-सवाई माधोपुर, अजमेर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालोर, उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, कोटा और झालावाड़-बारा।
त्रिपुरा: त्रिपुरा पूर्व।
उत्तर प्रदेश: अमरोहा, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा।
पश्चिम बंगाल: दार्जिलिंग, रायगंज और बालूरघाट।

दरअसल देश की 543 लोकसभा सीटों में से 65 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम वोटर जीत और हार में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ये वो सीटें हैं जहां मुस्लिम वोटरों की संख्या 30 फीसदी से लेकर 80 फीसदी तक है। वहीं, करीब 35-40 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां इनकी मुस्लिम समुदाय के वोटरों की अच्छी खासी संख्या है। यानि करीब 100 लोकसभा सीट ऐसी हैं जहां अगर वोटों का ध्रुवीकरण हो गया तो भाजपा के लिए उसके लक्ष्य 400 के आंकड़े को हासिल करना आसान हो जाएगा। ऐसे में एक बार फिर ये साफ हो गया विपक्षी कितनी भी कोशिश कर लें वो चुनाव बीजेपी की पिच पर ही लड़ने को मजबूर हैं।

Continue Reading

Trending