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सरकारी निधि खर्च न होने से विकास बाधित : जेटली

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जेटली

arun jaitleyनई दिल्ली। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा कि सरकारी निधि को ज्यादा लंबे समय तक बिना इस्तेमाल के जमा करके रखने से विकास बाधित होता है और यह सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) में प्रौद्योगिकी की उन्नति ही है, जिससे इसे ज्यादा पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। जेटली ने महालेखा नियंत्रक (सीजीए) के नए कार्यालय परिसर, महालेखा नियंत्रक भवन के उद्घाटन के मौके पर कहा, अनेक बिंदुओं पर सरकारी निधि के अनिश्चित समय तक जमा रहने से विकास बाधित होता है। यह सिर्फ अक्षमता की तरफ नहीं ले जाता, बल्कि विकास में भी बाधक है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली सरकारी निधि की निगरानी में समक्ष बनाती है और यह सुनिश्चित करती है कि परियोजना के लिए दिए गए पैसे का खर्च हो रहा है या नहीं। जेटली ने कहा, विकास में वृद्धि हुई है, यह खर्च में कई गुना वृद्धि के बदले आई है। आने वाले वर्ष में खर्च में बहुत ज्यादा वृद्धि होगी। यह तीव्र विकास के लिए जरूरी है।

उन्होंने कहा, लेखा प्रक्रिया भी ज्यादा तेज हो गई है। महालेखा नियंत्रक एम. जे. जोसेफ ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने राज्य सरकारों से पीएफएमएस में शामिल होने को कहा है। इसमें नौ राज्यों ने पहले ही आंकड़ों की विनिमय प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, किसी को इसे अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया गया है, यह सहकारी संघवाद की भावना को ध्यान में रखते हुए लागू किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही इससे 15 से ज्यादा राज्य जुड़ेंगे। जोसेफ ने कहा, इसका मकसद सभी राज्यों को पीएफएमएस के जरिए 31 मार्च, 2017 तक एकीकृत कर देना है। पश्चिम बंगाल के एकीकरण के विरोध के संबंध में उन्होंने कहा कि केंद्र ने फिर पश्चिम बंगाल के वित्त सचिव को इस फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए पत्र लिखा है।

इस मौके पर सीजीए और आंतरिक लेखा परीक्षकों के संस्थान (आईआईए) के बीच कई मंत्रालयों और सरकारी विभागों के आंतरिक लेखा कार्य को मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक ज्ञापन समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया।

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मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन बोले-बाबर ने बनवाया था मंदिर

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नई दिल्ली। अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनावाई के 28वें दिन मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अदालत में बाबरनामा का हवाला दिया।

राजीव ने कहा कि वहां मंदिर ही बाबर ने बनाया था। उन्होंने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि हिन्दू पक्षकार तो गजेटियर का हवाला अपनी सुविधा के मुताबिक दे रहे हैं, लेकिन गजेटियर कई अलग अलग समय पर अलग नजरिये से जारी हुए थे। लिहाजा सीधे तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई।

राजीव धवन ने कहा कि जस्टिस अग्रवाल के इस विचार से भी इत्तेफाक नहीं रखता, जो कहीं रिपोर्ट को मान रहे हैं और कहीं नहीं। इस पर जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि कई पुरानी मस्जिदों में संस्कृत में भी कुछ लिखा हुआ मिला है। वो कैसे?

जज के सवाल का जवाब देते हुए राजीव धवन ने कहा कि क्योंकि बनाने वाले मजदूर कारीगर हिंदू होते थे तो वे अपने तरीके से इमारत बनाते थे।

बनाने का काम शुरू करने से पहले वो विश्वकर्मा और अन्य तरह की पूजा भी करते थे और काम पूरा होने के बाद यादगार के तौर पर कुछ लेख भी अंकित करते थे।

 

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