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असम : बोडो उग्रवादियों के खिलाफ अभियान तेज

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गुवाहाटी| असम में सुरक्षाबलों ने बोडो उग्रवादियों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। उग्रवादियों द्वारा जनजाति समुदाय के लोगों के संहार के बाद गुरुवार को वहां पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उनसे किसी भी तरह की वार्ता से इनकार कर दिया था और सुरक्षा बलों को व्यापक अभियान चलाने की स्वीकृति दी थी। एक वरिष्ठ सेना अधिकारी ने कहा कि नेशनल डेमोक्रेटिक फंट्र ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के वार्ता-विरोधी गुट के खिलाफ अभियान के लिए हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अर्धसैनिक बलों की 50 कंपनियों को हिंसा प्रभावित क्षेत्रों, सोणितपुर जिले के असम-अरुणाचल प्रदेश की सीमा तथा भारत-भूटान की सीमा पर तैनात किया गया है।

सेना प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल एस.न्यूटन ने कहा कि क्रिसमस के दो दिन पहले जिन जिलों में बोडो उग्रवादियों ने जनजाति समुदाय के लोगों का संहार किया था, वहां तथा उसके आसपास आतंकवाद-रोधी अभियान तेज कर दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि एनडीएफबी तथा अन्य उग्रवादियों के खिलाफ सेना कड़ी कार्रवाई करती रही है, लेकिन कोकराझार सोणितपुर तथा चिरांग जिले में जनसंहार के बाद इसे और तेज कर दिया गया है। अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “आने वाले समय में कार्रवाई और तेज होगी।”

न्यूटन ने कहा, “कुछ इलाकों में सेना हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन ऐसा हमला के लिए नहीं, बल्कि निगरानी के लिए किया जा रहा है।” केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कोकराझार तथा सोणितपुर जिले का दौरा किया तथा कानून व्यवस्था का जायजा लिया। मंत्री ने उग्रवादियों के खिलाफ समयबद्ध रूप से कार्रवाई की बात कही और असम सरकार से कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार हर तरह की मदद करेगी। असम सरकार ने कहा कि 2,500 से ज्यादा लोगों ने शरणार्थी शिविरों में शरण ली है।

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भारत के इस राज्य में तैयार हुआ कोरोना से लड़ने वाला रोबोट, डॉक्टरों में खुशी

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pic - ANI

कोरोना महामारी के बीच एक आशा की खबर सामने आ रही इंजीनीयरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्र ने घर बैठे एक ऐसा रोबोट तैयार किया है ,जो कोरोना महामारी में इन डाक्टरों की मदद तो करेगा ही साथ ही उन्हें इस बीमारी से बचायेगा और कोरोना पीड़ित मरीजों की भी सेवा करेगा।

महासमुंद जिले के गुडरूपारा निवासी इंजीनियरिंग के छात्र योगेश कुमार साहू ने अपने दो मित्रो ( प्रवीण वर्मा और रिषिकेश यादव ) की मदद से बनाया है। योगेश छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद टेक्निकल यूनीर्वसिटी भिलाई का बीई अंतिम वर्ष का छात्र है।

इस रोबोट को बनाने के लिए योगेश ने मेटल शीट, पीवीसी पाइप, लकड़ी, ग्यारह मोटर, माइक्रो फोन ,स्पीकर और इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड का उपयोग किया। रोबोट के आँखो में एलईडी लाईट का उपयोग किया। रोबोट किसी भी चीज को उठाकर एक जगह से दूसरी जगह ले जा सके इसके लिए रोबोट को मोबाईल फोन से कनेक्ट किया।

इस प्रकार रोबोट तैयार हो गया और रोबोट को बनाने में 5 हजार रूपये का खर्च आया। इस रोबोट का उपयोग अस्पतालों में मरीजों की देखभाल में किया जा सकता है,जो कोरोना जैसे बीमारियों से ग्रसित हो। इसका उपयोग कारखानो में मानेटरिंग, आर्मी में, केमिकल स्प्रे में, सुरंग में, न्यूक्लियर प्लांट में एवं लैंड माईन का पता लगाने और बम को निष्क्रिय करने में भी किया जा सकता है।

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