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तत्काल प्रभाव से हटाए तीन सौ से अधिक सरकारी ओहदेदार

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उत्तराखंड में राष्टपति शासन लागू, तत्काल प्रभाव से हटाए तीन सौ से अधिक सरकारी ओहदेदार

उत्तराखंड में राष्टपति शासन लागू, तत्काल प्रभाव से हटाए तीन सौ से अधिक सरकारी ओहदेदार

देहरादून। उत्तराखंड में राष्टपति शासन लागू होने के लगभग आठ दिन बाद कांग्रेस की निवर्तमान सरकार के कार्यकाल में नियुक्त हुए 300 से भी अधिक सरकारी ओहदेदारों को मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने तत्काल प्रभाव से हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के साथ ही विभिन्न महकमों में गठित आयोगों, निगमों, परिषदों में नामित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सलाहकार तथा अन्य पदों पर नियुक्त या नामित गैर सरकारी अधिकारियों को मिलने वाले मानदेय, सरकारी वाहन, डीजल-पेट्रोल सहित मिलने वाली तमाम सुविधाओं पर विराम लगा दिया है।

जिन अधिकारियों को संवैधानिक पदों पर निर्धारित अवधि के लिए नियुक्त किया गया है, यह आदेश उनपर लागू नहीं होगा। सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ अपर महाधिवक्ता पद से अवतार सिंह रावत और नैनीताल हाईकोर्ट में मुख्य स्थाई अधिवक्ता पद पर कार्यरत सुभाष उपाध्याय को भी पदमुक्त कर दिया गया है। ज्ञात हो कि प्रदेश में बीती 27 मार्च को राष्‍ट्रपति शासन लागू होने के साथ ही मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को कार्यमुक्त किया गया था।

यह विडंबना ही है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को बर्खास्त किए जाने के बावजूद निवर्तमान सरकार के कार्यकाल में पार्टी नेताओं और चहेतों को दरियादिली से बांटे गये सरकारी ओहदों की सुविधा को वापस लेने में शासन को आठ दिन लग गये। उधर मुख्य सचिव ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, प्रभारी सचिवों को सोमवान को आदेश जारी कर महकमों में गठित विभिन्न आयोगों, निगमों, परिषदों, समितियों में नामित 300 से भी अधिक महानुभावों को तत्काल प्रभाव से बाहर करने के आदेश दिए हैं। इस आदेश से संवैधानिक पदों पर निर्धारित अवधि के लिए नियुक्त महानुभावों को राहत रहेगी। शासन के इस आदेश से सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

 

 

 

नेशनल

गर्भ से बाहर निकला बच्चे का हाथ डॉक्टरों ने वापस गर्भ में डाला, मौत बनी अंजाम

योगेश मिश्रा

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गुरुग्राम। एक डॉक्टर को धरती पर ईश्वर के तुल्य माना जाता है क्योंकि डॉक्टर ही किसी की जान बचा सकता है। लेकिन एक घटना ऐसी सामने आई है जिसमें डॉक्टरों की शर्मनाक हरकत की वजह से एक गर्भवती महिला के नवजात बच्चे की जान चली गई। गुरुग्राम के एक सिविल अस्पताल में गर्भवती महिला लेबर पेन से तड़प रही थी। उसके बच्चे का हाथ गर्भ से बाहर आ गया तो डॉक्टरों ने बच्चे का हाथ वापस गर्भ में डाल दिया। इसके बाद नवजात बच्चे की मौत हो गई।

पटौदी में दौलताबाद के निवासी जयदेव अपनी गर्भवती पत्नी सोनिया को गुडग़ांव के सिविल अस्पताल में ले गए। यहां डॉक्टरों ने बताया कि खून की कमी से खतरा होने के कारण यहां डिलीवरी नहीं हो पाएगी। इसलिए महिला को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रेफर किया जाएगा। सोनिया को सिविल अस्पताल में ही तीन घंटे तक एक व्हीलचेयर पर दूसरे अस्पताल में रेफर करने की बात कहकर बिठाए रखा। महिला असहनीय दर्द से तड़पती रही। इसी दौरान गर्भ से शिशु का एक हाथ बाहर आ गया। जब डॉक्टरों और स्टाफ को इस बारे में बताया गया तो उन्होंने बच्चे के हाथ को गर्भ में अंदर डाल दिया।

जब महिला को सफदरजंग अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस में लिटाया गया तो उसकी डिलीवरी हो गई। डिलीवरी के बाद महिला को वार्ड में शिफ्ट किया। जहां उसके बच्चे की मौत हो गई।

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