ब्रह्म का सगुण साकार स्वरूप सृष्टि के पूर्व ही सनातन है

इस ब्रह्मसूत्र के भाष्‍य में भी शंकर ने लिखा है। यथा – यदा स सशरीरतां संकल्‍पयति तदा सशरीरो भवति। यदा

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