राधा जी को श्रीकृष्ण माधुर्य रस के पान का सौभाग्य प्राप्त था

एक बार पुनः खेलते हुये नन्‍दललन को अपना प्रतिबिंब दिखाई पड़ा। बस फिर क्‍या था- उसे चिपटाने के लिए बार-बार

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