Film Preview : Blood Money

Film Preview : Blood Money

निर्माता : मुकेश भट्ट

निर्देशक : विशाल म्हाडकर

संगीत : संगीत हल्दीपुर, , सिद्धार्थ हल्दीपुर, जीत गांगुली

कलाकार : कुणाल खेमू, अमृता पुरी, मनीष चौधरी, मिया

रिलीज डेट : 30 मार्च 2012



कहानी:



ब्लड मनी कहानी एक महत्वाकांक्षी युवक कुणाल (कुणाल खेमू) पर केन्द्रित है। कुणाल छोटी उम्र में ही अनाथ हो जाता है इसलिए उसे पार्ट टाइम जॉब करनी पड़ती है। पार्ट टाइम जॉब करते हुए कुणाल अपनी कालेज की पढ़ाई पूरी करता है और एमबीए भी।



कुणाल अपनी लाइफ को बेहतर बनाने के लिए विदेश जाकर खूब पैसे कमाना चाहता है। दक्षिण अफ्रीका स्थित ट्रिनीटी डायमंड्स कंपनी में उसे नौकरी मिल जाती है। अच्छी सैलेरी, कार, शानदार बंगला और केपटाउन में काम करने का मौका। कुणाल को तो मानो मन मॉगी मुराद मिल जाती है।



और ज्यादा पैसे कमाने की चाहत में कुणाल कुछ ऐसे लोगों के चक्कर में पड़ जाता है जो उसे बुराई के दलदल में ढ़केल देते हैं। कुणाल यह बात अपनी पत्नी आरजू को बताता है। आरजू, कुणाल को भारत वापस चलने के लिए कहती है। पर कुणाल कंपनी के साथ ही काम करने का फैसला करता है ताकि वह उन लोगों के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर सके जिन्होने उसे फॅसाया है।



स्टोरी ट्रीटमेंट:



इस फिल्म की कहानी, फिल्म 'जन्नत' से काफी मिलती-जुलती है। खासकर क्लाइमेक्स में जब कुणाल काम की वजह से अपनी पत्नी आरजू को वक्त ही नहीं दे पाता। 'जन्नत' में भी कुछ ऐसा ही दिखाया गया है। फिलहाल फिल्म का क्लाइमेक्स काफी कन्फ्यूज कर देने वाला है।



स्टार कास्ट:



एक महत्वाकांक्षी युवक के चरित्र में कुणाल खेमू ने बहुत ही उम्दा अभिनय किेया है। वहीं अमृता पुरी ने अभिनय तो ठीक-ठाक किया है मगर कई जगहों पर वो ओवर एक्टिंग भी करती नजर आई हैं| मनीष चौधरी ने खडूस बॉस के रोल में काफी प्रभावित किया है। मिया उएदा कोई भी प्रभाव छोड़ने में विफल रही है पर संदीप सिकंद ने छोटे से रोल से ही छाप छोड़ने में सफल रहे हैं।



डायलाग्स/एडिटिंग/संगीत:



फिल्म में डायलाग्स और एडिटिंग तो साधारण है पर संगीत बेहतरीन है। मूलत: देखा जाए तो बेहतरीन संगीत ही इस फिल्म की जान है। इस फिल्म के संगीत ने खासी धूम भी मचा रखी है।



निर्देशन:

इस फिल्म के निर्देशक विशाल महादकर की यह पहली फिल्म है पर उनमें एक अच्छे निर्देशक बनने के सारे गुण दिखते हैं। ये बात अलग है कि कमजोर स्क्रीनप्ले और कहानी की वजह से इस फिल्म का निर्देशन उतना प्रभावशाली नहीं लगता पर कहा जा सकता है कि पहली फिल्म होने के नाते विशाल ने अपना बेस्ट देने की पूरी कोशिश की है।

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