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सचिन पर होगा दबाव: रामदेव
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Saturday, Apr 28 2012 5:08PM IST
नई दिल्ली। सचिन तेंदुलकर को राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर सियासत जारी है। अब इस मुद्दे पर बोलने की बारी बाबा रामदेव की थी और योग गुरू बोले भी। रामदेव ने कहा कि ऐसा मुमकिन है कि कांग्रेस ने अपनी डूबती नैया पार लगाने और अपनी साख बढ़ाने के मकसद से सचिन पर संसद के उच्च सदन की सदस्यता स्वीकारने का दबाव बनाया हो।



बीसीसीआई के किसी आला अधिकारी और कांग्रेस ने नामांकन स्वीकार करने के लिए सचिन पर दबाव बनाये जाने के सवाल पर रामदेव ने कहा कि मुझे ऐसा कई हलकों से सुनने को मिला है।



सचिन पर मनोनयन स्वीकार करने को लेकर दबाव बनाए जाने की बात आधारहीन करार देने से इंकार करते हुए रामदेव ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी डूबती नैया को पार लगाने के लिए सचिन को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है।



उन्होंने कहा कि तेंदुलकर और रेखा को मनोनीत किया जाना असल मुद्दों से देश की जनता का ध्यान हटाने का प्रयास है। किसी को भी सचिन को सम्मानित किए जाने पर ऐतराज नहीं होगा।



रामदेव ने संवाददाताओं से कहा कि राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने से लोगों को सचिन से यह सवाल करने का मौका मिल गया है कि वह चुप्पी ही साधे रहेंगे या फिर भ्रष्टाचार और विदेशों में जमा काले धन को देश में लाने के मुद्दे पर कुछ बोलेंगे भी।



उन्होंने कहा कि सचिन को अपना हर फैसला लेने का हक है। उन्होंने कई शतक लगाए हैं। उन्होंने कई छक्के जड़े हैं लेकिन अब लोगों को उनके दरवाजे खटखटा कर उनसे यह कहने का मौका मिला है कि वह चुप्पी ही साधे रहेंगे या फिर कुछ बोलेंगे भी।

रामदेव ने कहा कि देश की जनता को सचिन को भारत रत्न से भी सम्मानित किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन कांग्रेस यह सोच रही है कि किस तरह से सचिन को अपने साथ जोड़ा जाए। इसलिए उन्हें भारत रत्न न दिए जाने में राजनीति है। उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने में भी सियासत है।



सियासत में सचिन के कदम रखने के मुद्दे पर रामदेव ने कहा, सचिन देश के एक जिम्मेदार नागरिक हैं। वह कोई बच्चे नहीं हैं, यह उन पर निर्भर है कि क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वह क्या करने का फैसला करते हैं।

तो यह वजह है रेखा को RS में भेजने की

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर से जुड़ी कोई बात हो तो उसे सुर्खियां मिलती ही हैं, वह बात चाहे उनके खेल की हो, खेलों से सन्यास लेने की हो या राज्यसभा सदस्य बनने की लेकिन यह भी ध्यान देने की बात है कि सचिन के साथ ही राज्यसभा में भेजे जाने के लिए फिल्म अभिनेत्री रेखा को क्यों चुना गया? लाइम लाइट से दूर रहने वाली रेखा को अचानक राज्यसभा में भेजने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?

दरअसल, रेखा के मनोनयन के पीछे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की एक तीर से दो निशाना साधने की सोची-समझी रणनीति है। पहला तो सोनिया राज्यसभा में सपा की जया बच्चन के मुकाबले रेखा को उतारना चाहती हैं। जया बच्चन को जितना नापसंद सोनिया करती हैं, उतनी ही रेखा भी। शायद इसीलिए रेखा कांग्रेस के प्रस्ताव पर राजी भी हो गईं। सोनिया की रणनीति का दूसरा हिस्सा तमिलनाडु में पार्टी के लिए एक लोकप्रिय चेहरे को पेश करना है।

द्रविडिय़न पार्टियों के प्रभुत्व वाले तमिलनाडु में कांग्रेस दशकों से कभी अन्नाद्रमुक तो कभी द्रमुक की दूसरे दर्जे की सहयोगी बनने को मजबूर है। रेखा का मनोनयन इससे उबरने की एक कोशिश है। तमिलनाडु में चाहे जो हो, लेकिन यह तय है कि अरसे बाद जया बच्चन और रेखा राज्यसभा में एक साथ दिखेंगी। फर्क सिर्फ इतना होगा कि डायरेक्टर की भूमिका में एक ओर मुलायम सिंह होंगे तो दूसरी ओर सोनिया गांधी।