श्रीकृपालु जी महाराज: श्रीकृष्ण सर्वव्यापक हैं।

श्रीकृपालु जी महाराज: श्रीकृष्ण सर्वव्यापक हैं।

फिर कहता है वेद। एक हैं अनन्त रूप धारण कर लेते हैं। महारास में जितनी गोपियॉ उतने श्रीकृष्ण बन गए। 16108 स्त्रियों से विवाह करना हुआ तो भला कौन पण्डित विवाह करवा सकेगा।16108 से और कितने महीने लग जायेंगे। तो वो बिचारी स्त्रियॉ और वो स्वयं श्रीकृष्ण तब तक न कुछ खायेंगे ,न पियेंगे ,न नहायेंगे,न धोयेंगे। अरे 16108 । एक की शादी में सारी रात बीत जाती है। आप लोगों में बहुतों की हुई है,याद होगा और नहीं अपनी हुई तो दूसरे की देखा होगा ।

लेकिन वहां श्रीकृष्ण स्वयं 16108 बन गए । बनना क्या,हैं। नारद जी गये,उन्होंने कहा कि देखें ये 16108 से कैसे निभते है अकेले और कितनी लड़ाई होती होगी,आपस में ईष्या द्वेष । न न,हर स्त्री को यही अनुभव होता था, केवल मेरे पास हैं और कहीं नहीं गये ।

महारास में हर गोपी को यही रियलाइज हुआ कि यही अनुभव किया वो मेरे गले में हाथ डाले हैं और किसी के नहीं । जितने सखा गोचारण में कलेवा कर रहे हैं,सब समझ रहे हैं, मेरे ही मुह में डाल रहे हैं। क्योंकि वो सर्वव्यापक हैं।

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