कही दोस्त ही ना बन जाए बच्चों का दुश्मन

कही दोस्त ही ना बन जाए बच्चों का दुश्मन

आज के समय में इंटरनेट हमारी लाईफ स्टाइल का एक अभिन्न अंग बन गया है। इंटरनेट का उपयोग करना एक स्टेट्स सिंबल है। पर आप जिसे अपने बच्चों का दोस्त समझते है, तो आपका यह मानना आपके और आपके बच्चों दोनों के लिए खतरनाक हो सकता हैं।

इंटरनेट जहां आपार ज्ञान का सागर है वही यह एक गंभीर समस्या भी बनता जा रहा है। भारत में इसका उपयोग करने लोगों बीच एक नई प्राब्लम साइबरबेटिंग बढ़ती जा रही है।

इसका सबसे ज्यादा इफेक्ट स्कूल के बच्चों पर देखने के मिल रहा है। वह अपने टीचर और दोस्तों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे है, या उन्हें चिढ़ाते है और उनके प्रतिक्रिया को रिकार्ड कर नेट पर अपलोट कर देते है। जिसका सबसे बड़ा कारण बच्चों के बीच में बढ़ता मोबाइल का प्रयोग।

एक आनलाइन कंपनी के सर्वे में पता चला है की भारत में बच्चों का इंटरनेट के प्रति अनुभव बहुत सकारत्मक नहीं है। बच्चे इंटरनेट कर उपयोग चैटिंग या फिर या फिर अपने दोस्तों को अश्लिल तस्वीरों भेजने, या फिर दूसरों की प्रोफाइल से उनकी फोटो या व्यक्तिगत चीजों को निकाल कर दूसरी जगह पर अपलोड कर देते है जो साइबर क्राइम में आता है।

बच्चों की बढ़ती डिमांड

आज कल बच्चों के बीच में किसी चीज को लेकर काफी जागरूकता आ गई है। इसका सबसे बड़ा कारण है इंटरनेट, भारतीय अभिभावकों का माना है कि उनके बच्चें ने बिना उन्हें बताए उनका क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल किया है। पुछे जाने पर उन्होंने पैसे को कहा खर्च किया तो बच्चों ने बताया कि उन्होंने इंटरनेट पर दिखे विज्ञापन को देख कर उन्होंने गाने की सीडी, किसी पत्रिका ग्राहक बनने या किसी कार्यक्रम का टिकट खरीदने के लिए उनके क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल किया है। जिसे ना चाहते हुए भी हमें मानना पड़ता है।

बच्चों पर रखे विशेष ध्यान

अगर आपका बच्चा फोन या कम्पयूटर का ज्यादा प्रयोग कर रहा है, तो माता पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चों के फोन और उनकी कम्पयूटर की समय समय पर जांच करे। देखे की आपका बच्चा कही किसी ऐसी चीज का उपयोग तो नही कर रहा है जिसका उसके लाइफ या स्टडी पर असर तो नही हो रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक 86 परसेंट बच्चें जैसे ही सोशल नेटवर्किंग साइट पर पर लॉग इन होते ही उनको ऐसी चीजें या फोटो देखने को मिलती है जो उन्हें किसी उनके दोस्त ने फारर्वड किया होता है। इसका उनके लाइफ में गहरा असर पड़ता हैं।

बच्चों के लिए बनाए नियम

अभिभावकों को चाहिए की इंटरनेट का उपयोग करने वाले अपने बच्चों के लिए नियम बनाए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 75 प्रतिशत बच्चे अभिभावकों के द्वारा बनाए गए नियामों के बावजूद भी अनचाही घटनाओं का शिकार होते है। अभिभावकों को बच्चों से खुलकर हर विषय पर बात करनी चाहिए और उनके अच्छे बुरे के बारे में बताना याहिए।

उन्हें यह बताना चाहिए कि उनको क्या कहना है, क्या करना है और कैसे करना है। उन्हे यह समझने में मदद करे कि उनके लिए क्या अच्छा है। उन्हें क्या नही करना चाहिए।

समय से पहले आनलाइन हो जाते हैं

बाल मनोविज्ञान कि माने तो आज 20 प्रतिशत बच्चे समय से पहले ही अपनी आनलाइन पहचान बना चुके होते है। अभिभावकों लगता है कि उनका बच्चा अभी इन सब चीजों से दूर है पर उनकी सोच तो काफी पीछे होती है और उनका बच्चा उस से काफी आगे हो जाता है। मनोविज्ञान की माने तो आज के समय में तकनिक काफी आगे है अब मोबाइल नेट ने बच्चों को और सक्रिय बना दिया है। अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों को महंगा मोबाइल ना दे और और उनकी हर गतीविधी पर विशेष ध्यान रखे।

इंटरनेट का सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों के मूवमेंट पर पड़ा है आज के समय में बच्चा अपने दोस्तो के साथ घूमा कम कर नेट पर ऑनलाइन रहना पसंद करता है।

श्याम चंद्र सिंह

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