रीसैट-1 के प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती शुरू

रीसैट-1 के प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती शुरू

चेन्नई। इसरो के मौसम उपग्रह राडार इमेजिंग सैटेलाइट (रीसैट-1) प्रक्षेपित करने की 71 घंटे की उलटी गिनती सोमवार को शुरू हो गई। इसे गुरुवार को श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 5:47 बजे छोड़ा जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (पीएसएलवी) द्वारा प्रक्षेपित किया जाने वाला यह सबसे भारी उपग्रह है।

इसरो के एक प्रवक्ता ने बताया कि रीसैट-1 के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती सुबह 6:47 बजे से श्रीहरिकोटा में शुरू हो गई। यह 71 घंटे लंबी उल्टी गिनती है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रीसैट-1 का प्रक्षेपण 26 अप्रैल को सुबह 5:47 बजे किया जाना है।

गौरतलब है कि भारत वर्तमान में एक कनाडाई उपग्रह से ली गई तस्वीरों पर निर्भर है क्योंकि घरेलू रिमोट सेंसिंग अंतरिक्ष यान उस वक्त धरती की तस्वीरें नहीं ले सकते जब आकाश पर घने बादल होते हैं।

इसरो के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने कहा कि रेडार इमेंजिंग उपग्रह (रीसैट-1) करीब 1,850 किलोग्राम वजन का है। इसलिए किसी पीएसएलवी के द्वारा प्रक्षेपित किया जाने वाला यह सबसे भारी उपग्रह होगा।

रीसैट-1 की इसके विकास सहित लागत करीब रुपये 378 करोड़ रुपये है। इसके रॉकेट (पीएसएलवी-सी 19) के निर्माण में 120 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इससे यह मिशन 498 करोड़ रुपये को हो गया है।

सूत्रों ने बताया कि प्रक्षेपण वाहन रीसैट-1 उपग्रह को पृथ्वी से ऊपर 480 किमी की कक्षा में 97.552 डिग्री पर स्थापित करेगा। उपग्रह पर मौजूद उपकरण इसे धक्का देकर 536 किलोमीटर की ऊंचाई पर अंतिम रूप से स्थापित कर देंगे। यह इसरो का पहला रेडार इमेजिंग सैटेलाइट होगा जो हर तरह के मौसम, बारिश, तेज गर्मी, कोहरे और चक्रवात में भी तस्वीरें लेने में सक्षम है। उपग्रह का कार्यकाल पांच वर्ष का है।

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