रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया

रघुराज प्रताप सिंह का जन्म सन् 1969 में,  उत्‍तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में राजा उदय प्रताप सिंह के यहाँ हुआ। इनके दादा राजा बजरंग बहादुर सिंह, पंत नगर विश्वविद्यालय के संस्थापक थे और बाद में हिमाचल प्रदेश के पहले गवर्नर बने। राजा भैया अपने परिवार के पहले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने पहली बार राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश किया। इनकी शिक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय में हुई।


राजा भैया का आपराधिक इतिहास रहा है। वह अब भंग हो चुके पोटा कानून के तहत जेल में भी रहे हैं और उनके घर पर रेड मारने वाले पुलिस ऑफिसर की हत्या के आरोपी हैं। संदेहास्पद परिस्थिति में पुलिस अधिकारी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। सीबीआई अभी भी इस मामले की जांच कर रही है। इसके अलावा भी उनके खिलाफ मुकदमों की लंबी लिस्ट है। इस विधानसभा चुनाव के दौरान राजा भैया ने चुनाव आयोग में जो हलफनामा जमा किया है,  उसके मुताबिक उनके खिलाफ लंबित आठ मुकदमों में हत्या की कोशिश, अपहरण और डकैती के मामले भी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश गैंगेस्टर ऐक्ट के तहत भी उनके खिलाफ मामला चल रहा है। यही नही राजा भैया ने चुनाव के नामांकन पत्र मे अपनी उम्र 38 साल दिखाने पर भी बवाल हुआ।


रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया एक प्रसिद्ध भारतीय राजनेता है। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ विधानसभा के कुंडा चुनाव क्षेत्र से लगातार पाँच बार विधायक रह चुके है, वर्तमान में उत्तर प्रदेश के खाद्य और आपूर्ती मंत्री पद पर कार्यरत है।
 

राजा भैया 1993 और 1996 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी समर्थित, तो 2002 और 2007 के चुनाव में एसपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधायक चुने गए। राजा भैया, बीजेपी की कल्याण सिंह सरकार और एसपी की मुलायम सिंह सरकार में भी मंत्री बने। पिछले चुनाव में राजा भैया से करीब 50 हजार मतों से हारने वाले शिव प्रकाश मिश्र को बहुजन समाज पार्टी ने कुंडा से एक बार फिर मैदान में उतारा था लेकिन यह उनके लिए कोई नफे का सौदा नहीं रह पाया। वहीं बीजेपी ने त्रिभुवन नाथ मिश्र और कांग्रेस ने रमाशंकर यादव को उम्मीदवार बनाया था जोकि कहीं आस पास भी नहीं ठहरे।



नए परिसीमन का भी राजा भैया पर कोई खास असर पड़ता नहीं दिखा। नए परिसीमन में कुंडा सीट के कुछ क्षेत्र कट गए हैं और नई सीट में पड़ोस की बाबागंज विधानसभा का कुछ हिस्सा शामिल हो गया है। बाबागंज विधानसभा क्षेत्र को राजा भैया के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है क्योंकि पिछले तीन चुनावों से लगातार वहां राजा भैया समर्थित उम्मीदवार ही जीत दर्ज करता आ रहा है।
 


बाहुबली दबंग राजनेता रघुराज प्रताप सिंह कुंडा की सीट से, स्वतंत्र पूर्वक सन् 1993 में राज्य स्तरीय चुनाव में भाग लिया और विजयी होकर विधायक बने। तब वह सिर्फ 26 वर्ष के थे। सन् 1999 में इण्डियन जनरल इलेक्शन में इन्होंने राजकुमारी रत्ना सिंह के खिलाफ (जो कि इसी परिवार से ही सम्बंधित हैं), अपने चचेहरे भाई अक्षय प्रताप सिंह को उतार दिया। इसी चुनाव से राजा भईया ने अपराधिक दावपेचों का प्रयोग करना शुरु किया।


उन्होंने 88255 से इस सीट पर बीएसपी के शिव प्रकाश मिश्रा को पटखनी दी। वैसे कमजोर विपक्ष और नए परिसीमन से सियासी समीकरणों पर कोई खास असर न पड़ने से समाजवादी पार्टी (एसपी) समर्थित राजा भैया की राह इस बार भी आसान दिखाई दे रही थी।


राजा भैया ने 1993 में हुए विधानसभा चुनाव से कुंडा की राजनीति में कदम रखा था। तब से वह लगातार अजेय बने हुए हैं। उनसे पहले कुंडा सीट पर कांग्रेस के नियाज हसन का डंका बजता था। हसन 1962 से लेकर 1989 तक कुंडा से पांच बार विधायक चुने गए।


ऱाजा भैया और अपराध का चोली दामन का साथ रहा है। 2 मार्च 2013 केा पुलिस उपाधीक्षक जिया उल हक की हत्या के आरोप की वजह से राजा भैया को अपने मंत्री पद से इस्‍तीफा देना पङा।

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