सरकारी धन के फर्जीवाड़े में लिप्त सुशील मोदी बर्खास्त हो : लालू

पटना, 12 अगस्त (आईएएनएस)| राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने बिहार के भागलुपर जिले में एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा किए गए सरकारी धन के फर्जीवाड़े में बिहार के उपमुख्यमंत्री और वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी की संलिप्तता का शनिवार को आरोप लगाया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की वह उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें। लालू ने दावा किया कि इस फर्जीवाड़े में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी धन का घोटाला हुआ है। लालू ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की भी मांग की है।

पटना में शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन मंे लालू ने कहा कि इतना बड़ा घोटाला बिना सरकार के संरक्षण के नहीं हो सकता। लालू ने इस घोटाले को पशुपालन घोटाले से भी बड़ा होने का दावा किया और कहा, लोग कहते हैं कि पशुपालन विभाग में बड़ा घोटाला हुआ है, लेकिन भागलपुर में सृजन महिला सहयोग समिति द्वारा किया गया फर्जीवाड़ा उससे काफी ज्यादा बड़ा घोटाला है। पिछले 16 सालों से बिहार की जनता की गाढ़ी कमाई को सरकार के संरक्षण में लूटा जा रहा था। इसका आकार 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कई सारी बातें छुपाई जा रही हैं।

लालू ने कई पेपर कटिंग और तस्वीरें दिखाते हुए कहा, इन तस्वीरों में स्वयंसेवी संस्था सृजन महिला विकास सहयोग समिति की संस्थापक मनोरमा देवी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सुशील मोदी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, भाजपा नेता शहनजवाज हुसैन, मनोज तिवारी सहित कई नेता और अधिकारी हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसे में इनके संबंध सृजन संस्था से हैं।

लालू ने कहा, भागलपुर में जो सरकारी धनराशि का घोटला हुआ है, उसमें मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समान रूप से दोषी हैं। इस मामले में जो खबरें आ रही हैं, उसके मुताबिक इस घोटाले में इस जिले में रहे दर्जन भर जिलाधिकारी, सरकार द्वारा संरक्षित बड़े व्यवसायी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, पूर्व सांसद शहनवाज हुसैन, भाजपा सांसद मनोज तिवारी तथा जद (यू) और भाजपा के स्थानीय नेता शामिल हैं।

उन्होंने दावा किया कि स्वयंसेवी संस्था के पैसों को अन्य के खातों में स्थानांतरित कर उसे रियल एस्टेट में निवेश किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस संस्था के पैसे न केवल बिहार में, बल्कि विदेशों में भी निवेश किए गए हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, यह महज संयोग है या पैसे के बंदरबांट का तरीका है कि वर्ष 2005 में बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बनी थी और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी को वित्त विभाग दिया गया था, उसी समय से यह घोटाला चल रहा है।

हाल में बनी सरकार में भी एक बार फिर सुशील मोदी को वित्त विभाग दिया गया है।

उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने के बाद ही सही स्थिति का पता चल सकेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने जिस एसआइटी की टीम को इस मामले की जांच के लिए लगाया है, उसमें शामिल अधिकारी नीतीश के चहेते हैं।

उन्होंने अपने अंदाज में कहा, इस मामले में छोटे-छोटे अधिकारी और कर्मचारी ‘गरई मछली’ को पकड़ा जा रहा है। बड़ी मछली ‘रेहू’ जो सुशील मोदी हैं, को अब तक पकड़ा नहीं गया है।

लालू ने सवालिया लहजे में कहा कि ट्रेजरी के माध्यम से पीएल खाते से पैसा निकालकर स्वयंसेवी संस्था के खाते में पैसा रखने का आदेश किसने दिया?

उल्लेखनीय है कि इस फर्जीवाड़े में सृजन स्वयंसेवी संस्था में सरकारी योजनाओं के पैसे रखे जाने और संस्था द्वारा इसके व्यक्तिगत इस्तेमाल का खुलासा हुआ है।

इधर, राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा, भागलपुर फर्जीवाड़ा मामले में अभी तक प्रारंभिक जांच में 302.70 करोड़ की राशि के गबन का मामला प्रकाश में आया है। इस क्रम में यह बात सामने आई है कि बैंक अधिकारियों, स्वयंसेवी संस्था एवं सरकारी अधिाकरियों की मिलीभगत से जाली हस्ताक्षर, जाली बैंक स्टेटमेंट के आधार पर अवैध रूप से रुपये की निकासी की जा रही थी।

loading...
=>

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Time limit is exhausted. Please reload CAPTCHA.