संसद भवन भी नकदी संकट से अछूता नहीं

parliamentनई दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र के मंदिर संसद में भी नकदी का संकट है। स्वागत कक्ष में जहां विभिन्न तरह की यादगार चीजें बिकती हैं, वहां के कर्मचारी, परिसर में स्थित कैंटीन के साथ-साथ चाय बेचने वाले भी इस मुश्किल समय से गुजर रहे हैं। यहां तक कि परिसर में स्थित कुछ एटीएम बार-बार बगैर रुपये के हो जाते हैं।

राज्यसभा के कुछ काउंटर जो घडिय़ां, कलम और संसद भवन के लोगो वाले फोल्डर बेचते हैं, उनकी बिक्री में आठ नवंबर की नोटबंदी के बाद से बहुत कमी आई है। एक दुकान के कर्मचारी ने कहा कि सत्र के दौरान औसत बिक्री चार-पांच हजार की होती है, जो अब घटकर मात्र 1000 के करीब रह गई है।

एक व्यक्ति ने कहा, शायद लोगों के पास खर्च करने के लिए नकदी नहीं है। हमलोगों के पास भी लौटाने के लिए पर्याप्त खुदरा नहीं है। बिक्री में कमी आने की एक बड़ी वजह यह भी है कि यहां ई-भुगतान स्वीकार नहीं किया जा रहा है। संसद के किसी भी काउंटर पर ई-भुगतान की सुविधा नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता से डिजिटल लेन-देन का आग्रह कर रहे हैं और अपने रोजमर्रा के किराना सामान या अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के लिए कह रहे हैं। ऐसा लगता है कि यह संदेश संसद तक नहीं पहुंचा है।

एक चाय विक्रेता ने कहा कि यहां ई-भुगतान लेने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उससे जब यह कहा गया कि इसके लिए मुफ्त में एप डाउनलोड करने से ई-भुगतान मिलना शुरू हो जाएगा तो उसने कहा कि हम लोग ऐसा करने के लिए अधिकृत नहीं है। जब लोकसभा अध्यक्ष हमलोगों को इजाजत देंगी, तभी मोबाइल फोन के जरिए भुगतान स्वीकार करेंगे।

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