नोटबंदी पर लोकसभा दिनभर के लिए स्थगित

बंगाल में सेना की तैनाती पर लोकसभा में हंगामा, कार्यवाही बाधित

 

नई दिल्ली | कांग्रेस तथा तृणमूल कांग्रेस द्वारा मतविभाजन के नियम के तहत नोटबंदी पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामे के कारण शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने पश्चिम बंगाल में सेना की तैनाती का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस मामले में अंधेरे में रखा गया।

रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने यह कहते हुए तृणमूल नेता के दावे का खंडन किया कि यह नियमित अभ्यास था और ऐसा पिछले कई वर्षो से किया जाता रहा है। इसके बाद विपक्षी कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेता अध्यक्ष की आसंदी के पास पहुंचकर सरकार के नोटबंदी के फैसले के खिलाफ नारेबाजी करने लगे, जबकि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के सदस्य अपनी सीटों पर खड़े हो गए। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने हंगामा कर रहे सदस्यों से प्रश्नकाल बाधित नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह अन्य सदस्यों का अधिकार है। उन्होंने हंगामा कर रहे कुछ सदस्यों को चेतावनी दी कि जब मंत्री सवाल का जवाब दे रहे हों, तो उन्हें परेशान न करें।

नाराज महाजन ने कहा, “जब मंत्री सवालों का जवाब दे रहे हों, तो उन्हें परेशान करना सही नहीं है। मैं आपको चेतावनी दे रही हूं। मुझे आपका नाम देना पड़ेगा। “उन्होंने कहा, “कृपया इस तरफ (सत्ता पक्ष) न आएं। आप जो भी कर रहे हैं, इसके लिए मैंने आपको कभी नहीं टोका, लेकिन कृपया दूसरे सदस्यों के अधिकारों का हनन न करें। “लेकिन विपक्षी सदस्यों ने अध्यक्ष की एक न सुनी। प्रश्नकाल के दौरान जब हंगामा शांत नहीं हुआ, तो महाजन ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

सदन की कार्यवाही जब दोबारा शुरू हुई, तो अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव का नोटिस मंजूर नहीं किया, जिसे विपक्ष के दर्जनों सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों पर दिया था। जैसे ही नोटिस को मंजूरी नहीं दी गई, विपक्षी सदस्य एक बार फिर अध्यक्ष की आसंदी के निकट एकत्रित हो गए और हंगामा करने लगे। हंगामे के बीच अध्यक्ष ने सदस्यों से महत्वपूर्ण मुद्दों को शून्य काल के दौरान उठाने को कहा। आधे घंटे के बाद, जब विपक्षी सदस्य शांत नहीं हुए तो अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी।

पश्चिम बंगाल में सेना की तैनाती पर राज्यसभा की कार्यवाही बाधित

नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल में टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती का मुद्दा राज्यसभा में भी उठा। विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। इस क्रम में खूब नारेबाजी हुई, जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न हुआ। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना जर्मनी के तानाशाह हिटलर से की। विपक्ष ने पश्चिम बंगाल में टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती का मुद्दा उठाया, जिसके बाद सरकार ने कहा कि इसे बेवजह तूल दिया जा रहा है। यह नियमित सालाना सैन्याभ्यास था, जिसके बारे में राज्य सरकार को पहले ही सूचित कर दिया गया था।

विपक्षी सदस्य हालांकि सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और नारेबाजी जारी रखी, जिस वजह से सभापति हामिद अंसारी ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2.30 बजे तक स्थगित कर दी। विपक्षी सदस्यों ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही शून्य काल में यह मुद्दा उठाया। सभापति ने जैसे ही दोपहर 12 बजे प्रश्नकाल चलाने को कहा, विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद वे सभापति की आसंदी के पास पहुंच गए। उन्होंने ‘मोदी तेरी हिटलरशाही, नहीं चलेगी, नहीं चलेगी’ के नारे लगाए।

राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने पश्चिम बंगाल में सेना की तैनाती का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस बारे में पहले से सूचना नहीं दी गई थी। आजाद ने कहा, “पश्चिम बंगाल में 19 स्थानों पर टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती की गई। इस बारे में मुख्य सचिव, राज्य पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) को कोई सूचना नहीं दी गई। हम इसे समझ नहीं पा रहे हैं।”

आजाद ने कहा, “सेना की कई बार आपात स्थितियों में तैनाती की जाती है, लेकिन बंगाल में कोई आपात स्थिति नहीं है। वहां कानून एवं व्यवस्था की स्थिति अच्छी है। यह सिर्फ एक राज्य सरकार या एक पार्टी के लिए चिंता की बात नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए चिंताजनक है। “आजाद ने इस संदर्भ में सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की और मोदी से बयान भी मांगा। तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सुखेंदू शेखर रॉय और बसपा प्रमुख मायावती ने भी आजाद का समर्थन किया। रॉय ने कहा कि यह लोगों के भीतर भय बैठाने का केंद्र सरकार का प्रयास है।

मायावती ने इसे ‘देश के संघीय ढांचे पर हमला’ करार दिया। विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए सरकार ने इसे ‘नियमित अभ्यास’ करार दिया।

रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे एक बयान में कहा, “यह सेना के पूर्वी कमान का नियमित वार्षिक अभ्यास था। इसके लिए पहले 27-28 नवंबर की तारीख निश्चित की गई थी, लेकिन बाद में भारत बंद की वजह से कोलकाता पुलिस के आग्रह पर इसकी तारीख बढ़ाकर 30 नवंबर और दो दिसंबर कर दी गई।”

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