पर्रिकर ने सर्जिकल स्ट्राइक के लिए संघ की ट्रेनिंग को दिया क्रेडिट, विपक्ष भडक़ा

manohar parirkarअहमदाबाद। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उन्हें 29 सितंबर को नियंत्रण रेखा के उस पार सर्जिकल स्ट्राइक करने के लिए प्रेरित किया। वहीं विपक्ष ने रक्षा मंत्री के इस बयान की कड़ी निंदा की है। पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि इस तरह के बयान से सेना का मनोबल टूटता ह।ै

पर्रिकर ने सोमवार को कहा कि यह संभव नहीं था कि आरएसएस की विचारधारा को मानने वाले और महात्मा गांधी की भूमि के प्रधानमंत्री और गोवा के रक्षा मंत्री एक ऐसा मजबूत फैसला नहीं लें। पर्रिकर निरमा यूनिवर्सिटी में यहां छात्रों एवं शिक्षकों को ‘नो योर आर्मी’ कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे।

मंत्री ने कहा कि आतंकियों के ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक का आदेश देते समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शिक्षा प्रधानमंत्री और मेरे दिमाग में थी। पर्रिकर ने कहा कि 18 सितंबर को उड़ी स्थित भारतीय सेना के शिविर पर हमले के बाद से मोदी की जनता के बीच बहुत अधिक आलोचना की जा रही थी।

उन्होंने कहा, उड़ी में 19 सैनिकों के शहीद होने के बाद से सोशल मीडिया पर दोनों को निशाना बनाया गया और यह अभियान 29 सितम्बर तक तब तक चला जब तब सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक नहीं कर दिया। पर्रिकर ने कहा, अब कुछ लोग सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत चाहते हैं। यदि हम उन्हें ठोस सबूत दे दें तब भी ये लोग कभी भी सच्चाई को स्वीकार नहीं करेंगे।

रक्षा मंत्री ने कहा, एक बात सुनिश्चित है कि कोई भी भारतीय सेना के सत्यनिष्ठा और साहस पर संदेह नहीं कर सकता है। पर्रिकर ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक से दो चीजें हासिल हुईं। देश राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनशील हुआ और दूसरा पूरा राष्ट्र सेना के साथ हुआ।

मंत्री ने कहा कि पूर्व सैनिकों तक ने अपनी सेवा देने का प्रस्ताव दिया। वर्दी वाले लोगों का मनोबल इतना ऊंचा है। उन्होंने कहा कि उड़ी में जैसा हमला हुआ वैसे हमले भारतीय सुरक्षा बलों पर पिछले चार-पांच वर्षो से होते आ रहे हैं लेकिन पहली बार भारत ने दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया है।

गुजरात में सीमा पर बाड़ लगाने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि पूरी तरह से बाड़ लगाना जमीन दलदल वाली होने की वजह से संभव नहीं है। सुरक्षा बल आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर सीमा के उस पार की गतिविधियों पर नजर रखते हैं।

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