मप्र में सहकारी बैंकों तक नहीं पहुंची रकम

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केंद्र सरकार द्वारा 500-1,000 रुपये के नोट अमान्य किए जाने के बाद किसानों के सामने आ रही समस्याओं के मद्देनजर 21 हजार करोड़ रुपये नाबार्ड के जरिए उपलब्ध कराने का वित्त मंत्रालय ने 23 नवंबर को ऐलान किया था, लेकिन सात दिन बाद भी मध्य प्रदेश के सहकारी बैंकों तक राज्य के हिस्से की रकम नहीं पहुंची है। नोटबंदी के चलते केंद्र सरकार ने बैंकों से लेकर सहकारी बैंकों से रकम निकासी की सीमा तय की है। वहीं किसान पुराने 500 के नोटों से सरकारी समितियों से खाद बीज ले सकते हैं। सहकारी बैकों में शुरुआत के दिनों में पुराने नोट जमा करने की सुविधा मिली, जिसके बाद रोक लगा दी गई, लेकिन इन बैंकों से नोट बदले नहीं गए।                                                                                                                                                                                       नोटबंदी के बाद रकम निकासी को लेकर कई बार नियमों में बदलाव के चलते अन्य बैंक के साथ सहकारी बैंकों के खाताधारकों की परेशानी बढ़ती गई। उसके बाद केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने नाबार्ड के जरिए सहकारी बैंकों को 21 हजार करोड़ रुपये की राशि देने का ऐलान किया। मध्य प्रदेश के अपेक्स बैंक के सहायक महाप्रबंधक (किसान क्रेडिट) टी. के. सज्जन ने आईएएनएस को बताया कि सहकारी बैंकों के लिए घोषित की गई राशि में से राज्य के हिस्से की राशि नहीं आई है।
वहीं किसान नेता शिव कुमार शर्मा ने कहा, “वर्तमान सरकार सिर्फ घोषणाएं करती है। उसकी जमीनी हकीकत कुछ और होती है, जैसे नाबार्ड से रकम सहकारी बैंकों को देने की घोषणा हुई, लेकिन किसानों को रकम नहीं मिल रही है।” नार्बाड के प्रभारी जनसंपर्क अधिकारी जय निगम ने कहा, “उनके पास रीफायनेंसिंग के लिए फंड की कोई कमी नहीं है। सहकारी बैंकों की ओर से मांग ही नहीं की गई तो वे उन्हें रकम कैसे उपलब्ध कराएं।”

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